
दिल्ली अभिभावक संघ (DPA) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को कक्षा 10 की दोहरी परीक्षा प्रणाली को लेकर पत्र लिखा है। इस पत्र में कुछ नियमों का समर्थन किया गया है, जबकि कुछ में बदलाव की जरूरत बताई गई है। सीबीएसई ने मंगलवार को घोषणा की थी कि 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस योजना पर 9 मार्च तक जनता की राय ली जाएगी, जिसके बाद अंतिम नीति तय होगी। मसौदे के अनुसार, पहली परीक्षा 17 फरवरी से 6 मार्च तक और दूसरी परीक्षा 5 से 20 मई तक होगी।
सकारात्मक पहलुओं का समर्थन
DPA अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने कहा, “हम उन नियमों का समर्थन करते हैं जो छात्रों के लिए फायदेमंद हैं, जैसे स्कोर सुधार का विकल्प और तनाव कम करने के लिए परीक्षा दो बार देने की अनुमति।”
उन्होंने यह भी बताया कि अकादमिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्णय भी सराहनीय है। इससे उन छात्रों को मदद मिलेगी, जो पहली परीक्षा में एक से पांच विषयों में अनुत्तीर्ण हो जाते हैं। अब उन्हें “आवश्यक पुनरावृत्ति” के बजाय “सुधार श्रेणी” में रखा जाएगा।
कुछ नियमों पर आपत्ति
DPA ने विषय बदलने की सुविधा का समर्थन किया है, लेकिन चिंता जताई कि कुछ प्रावधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्य के विपरीत हैं।
शिक्षा में देरी और आर्थिक बोझ
– दूसरी परीक्षा के नतीजे 30 जून तक आने से कक्षा 11 की पढ़ाई तीन महीने देरी से शुरू होगी, जिससे छात्रों को सीखने के लिए कम समय मिलेगा।
– परीक्षा शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो पहले ही लिया जाएगा और वापस नहीं होगा।
– जो छात्र कक्षा 11 में स्कूल बदलेंगे, उनके अभिभावकों को देर से परिणाम आने के कारण अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
– परीक्षा की लंबी अवधि के कारण निजी कोचिंग का चलन बढ़ सकता है, जिससे माता-पिता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ने की आशंका
DPA का मानना है कि इस नई प्रणाली से छात्रों पर तनाव कम होने के बजाय बढ़ सकता है। लंबे समय तक परीक्षा प्रक्रिया चलने से वे लगातार दबाव में रहेंगे। कक्षा 10 का सत्र 15 महीने और कक्षा 11 का सत्र सिर्फ 7 महीने का होगा, जिससे स्कूलों को पाठ्यक्रम पूरा करने में दिक्कत होगी। इससे छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ेगा।
गर्मी की छुट्टियों पर असर
मई में होने वाली दूसरी परीक्षा गर्मी की छुट्टियों को प्रभावित करेगी। छात्र और शिक्षक आराम के बजाय परीक्षा की तैयारी में व्यस्त रहेंगे, जिससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों प्रभावित होगी।
DPA का सुझाव
DPA ने सुझाव दिया कि दोनों परीक्षाओं के बीच कम अंतराल रखा जाए। पहली परीक्षा जनवरी और दूसरी फरवरी में होनी चाहिए। इससे छात्रों को अपनी तैयारी के अनुसार परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। शैक्षणिक देरी रोकी जा सकेगी और वित्तीय दबाव कम होगा। कक्षा 11 में प्रवेश भी सुचारू रूप से हो सकेगा।




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