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कार्यस्थल पर आईटी और मीडिया क्षेत्र के कर्मचारी झेलते हैं सबसे अधिक तनाव, सर्वेक्षण में हुआ खुलासा 

केरल में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, आईटी क्षेत्र (84.3 प्रतिशत) और मीडिया (83.5 प्रतिशत) में काम करने वाले युवा कर्मचारियों को कार्यस्थल पर सबसे अधिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। यह अध्ययन केरल राज्य युवा आयोग द्वारा कराया गया, जिसकी रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष एम. शजार ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को प्रस्तुत की। इस अवसर पर राज्य के मत्स्य पालन, संस्कृति और युवा मामलों के मंत्री साजी चेरियन भी उपस्थित थे।

बैंकिंग, बीमा और गिग कर्मचारियों को भी तनाव की शिकायत
सर्वेक्षण के मुताबिक, बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 80.6 प्रतिशत कर्मचारियों और गिग अर्थव्यवस्था में कार्यरत 75.5 प्रतिशत कर्मचारियों ने भी कार्यस्थल पर तनाव की शिकायत की है।

पांच प्रमुख क्षेत्रों में हुआ सर्वेक्षण
रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा और औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को तुलनात्मक रूप से कम तनाव का सामना करना पड़ता है। यह अध्ययन 18-40 वर्ष की आयु वर्ग के कर्मचारियों के बीच किया गया था, जिसमें पांच प्रमुख क्षेत्रों—आईटी, गिग अर्थव्यवस्था, मीडिया, खुदरा/औद्योगिक और बैंकिंग/बीमा—के कुल 1,548 कर्मचारियों ने भाग लिया।

30-39 वर्ष की आयु के कर्मचारी सबसे अधिक तनावग्रस्त
अध्ययन से यह भी पता चला कि 30-39 वर्ष की आयु वर्ग के उत्तरदाताओं में कार्यस्थल पर तनाव का स्तर सबसे अधिक था। साथ ही, महिलाओं (74.7 प्रतिशत) में कार्यस्थल का तनाव पुरुषों (73.7 प्रतिशत) की तुलना में थोड़ा अधिक पाया गया।

एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी सामने आया कि 68.25 प्रतिशत कर्मचारियों (महिला और पुरुष) ने स्वीकार किया कि काम के बढ़ते दबाव के कारण उनका कार्य-जीवन संतुलन (वर्क-लाइफ बैलेंस) प्रभावित हो रहा है।

तनाव कम करने के लिए सुझाए गए समाधान
– कार्यस्थलों पर मनोरंजन और आराम के लिए विशेष स्थान (रिक्रिएशनल कॉर्नर) बनाए जाएं, जिससे कर्मचारियों को तनाव से राहत मिले।
– बड़ी कंपनियों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेषज्ञ अधिकारी (संगठनात्मक मनोवैज्ञानिक) नियुक्त किए जाएं, जो कर्मचारियों की मानसिक सेहत का ध्यान रखें।
– छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए सरकार एक ऐसा मॉडल अपनाए, जिससे वे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं और कार्यक्रम चला सकें।
– सरकार को मानसिक स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य करना चाहिए, जिसमें थेरेपी, काउंसलिंग और मनोरोग उपचार जैसी सुविधाएं शामिल हों।

राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
इन निष्कर्षों पर व्यापक चर्चा के लिए 3 और 4 मार्च को कझाकूट्टम में ‘आधुनिक कार्य दुनिया और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।

Asmita Sarkar

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