
भारत सरकार ने संसद में बताया कि 2024 में विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में पिछले साल की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। सबसे बड़ी गिरावट कनाडा जाने वाले छात्रों में देखी गई, जहां 41 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, रूस में भारतीय छात्रों की दिलचस्पी बढ़ी है, और वहां जाने वाले छात्रों की संख्या में 33.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में यह जानकारी दी, जब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर ने विदेशों में पढ़ाई करने वाले भारतीयों के बारे में सवाल किया। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीयों की संख्या 7,50,365 थी, जो 2023 में बढ़कर 8,92,989 हो गई थी। हालांकि, 2024 में यह संख्या घटकर 7,59,064 रह गई, जो 15 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।
कनाडा जाने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है, 2023 में 2,33,532 से घटकर 2024 में यह संख्या 1,37,608 हो गई, यानी 41 प्रतिशत की कमी। इसके पीछे कनाडा सरकार द्वारा स्टूडेंट वीज़ा नियमों को कड़ा करना और बढ़ते वीज़ा रिजेक्शन की दर जिम्मेदार है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव भी इस गिरावट का कारण हो सकता है, खासकर 2023 में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ा था।
वहीं, यू.एस., यू.के. और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों में भी भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है। यू.एस. में 12.9 प्रतिशत की गिरावट, यू.के. में 27.7 प्रतिशत की कमी, और ऑस्ट्रेलिया में 12 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इन देशों में यह गिरावट कड़े वीज़ा नियमों और अन्य नीतिगत बदलावों के कारण हो सकती है।
दूसरी ओर, रूस, फ्रांस, जर्मनी और न्यूजीलैंड जैसे देशों में भारतीय छात्रों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। 2022 में रूस में 19,784 भारतीय छात्र थे, जो 2023 में बढ़कर 23,503 हो गए और 2024 में यह संख्या 31,444 हो गई। इसी तरह, फ्रांस और जर्मनी में भी छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय छात्र अब पारंपरिक शिक्षा केंद्रों के अलावा नए देशों में भी उच्च शिक्षा के अवसर तलाश रहे हैं।




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