
विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को स्थानीय कानूनों का पालन करना चाहिए। यह बयान जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के एक पोस्टडॉक्टरल फेलो की हिरासत और एक अन्य भारतीय छात्रा को कनाडा भेजे जाने की घटना के बाद सामने आया।
भारतीय छात्रों की हाल की घटनाएं
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इन दोनों भारतीय नागरिकों ने अमेरिका में भारतीय मिशनों से किसी प्रकार की सहायता के लिए संपर्क नहीं किया था।
अमेरिकी होमलैंड सुरक्षा विभाग ने सोमवार रात को वाशिंगटन डीसी स्थित जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के पोस्टडॉक्टरल फेलो बदर खान सूरी को हिरासत में लिया। उन पर “हमास के दुष्प्रचार को बढ़ावा देने” के आरोप लगे थे। हालांकि, एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने सूरी के निर्वासन पर फिलहाल रोक लगा दी है।
सूरी की हिरासत की घटना के कुछ दिन बाद, कोलंबिया विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन के वीजा को रद्द कर दिया गया था। श्रीनिवासन पर “हिंसा और आतंकवाद का समर्थन” करने और हमास के पक्ष में गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था, जिसके बाद उन्हें अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।
छात्रों के लिए भारतीय दूतावास की सहायता
जायसवाल ने यह भी कहा कि अमेरिका में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास उन छात्रों की सहायता के लिए तैयार हैं, जिन्हें किसी कठिनाई का सामना हो रहा है।
वीजा और आव्रजन नीतियों पर विदेश मंत्रालय का रुख
विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि वीजा और आव्रजन नीतियों पर निर्णय लेना प्रत्येक देश का संप्रभु अधिकार है और सभी निवासियों को वहां के कानूनों का पालन करना चाहिए।
जायसवाल ने कहा, “जब वीजा और आव्रजन नीति की बात आती है, तो यह संबंधित देश की नीति के अनुसार तय होता है। हम उम्मीद करते हैं कि जब विदेशी नागरिक भारत आते हैं, तो वे हमारे कानूनों का पालन करते हैं। इसी तरह, जब भारतीय नागरिक विदेश में होते हैं, तो उनसे भी यह अपेक्षा की जाती है कि वे वहां के स्थानीय नियमों और कानूनों का पालन करें।”
सूरी और श्रीनिवासन के मामलों पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
बदर खान सूरी की हिरासत पर जायसवाल ने कहा, “हमें मीडिया रिपोर्ट्स से जानकारी मिली है कि इस व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। न तो अमेरिकी प्रशासन और न ही इस व्यक्ति ने हमसे या भारतीय दूतावास से संपर्क किया है।”
रंजनी श्रीनिवासन के मामले पर उन्होंने कहा, “भारतीय अधिकारियों को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उन्होंने मदद के लिए दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क किया था।”
उन्होंने बताया, “हमें मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से पता चला है कि वह अमेरिका छोड़कर कनाडा चली गई हैं।”




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