
केरल विधानसभा ने राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के मार्ग को खोलने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। सोमवार और मंगलवार को इस पर व्यापक चर्चा हुई, जिसके बाद इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।
उच्च शिक्षा मंत्री बिंदु ने विधेयक में किए गए संशोधनों और सुझावों पर संक्षिप्त चर्चा के बाद “केरल राज्य निजी विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) विधेयक, 2025” को पारित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
विपक्षी दृष्टिकोण और सिफारिशें
विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि यूडीएफ सैद्धांतिक रूप से विधेयक का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन उन्होंने सरकार से इसे लागू करने से पहले इसका गहन अध्ययन और जांच करने की अपील की। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के दौरान राज्य में विश्वसनीय कॉर्पोरेट शिक्षा एजेंसियों को प्राथमिकता देने का सुझाव भी दिया, जो दशकों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।
निजी विश्वविद्यालयों पर सख्त नियम
हालांकि विपक्षी मोर्चे की प्रमुख पार्टियों ने विधेयक पर कोई बड़ी आपत्ति नहीं जताई, रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी (RMP) के विधायक केके रेमा ने इसके खिलाफ कड़ी आवाज उठाई और वामपंथी सरकार से इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग की।
इस पर मंत्री बिंदु ने जवाब दिया कि राज्य में निजी विश्वविद्यालयों को सख्त सामाजिक नियमों और सतर्क हस्तक्षेप के साथ अनुमति दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विधेयक अचानक या जल्दबाजी में नहीं बनाया गया है, बल्कि राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों को सशक्त बनाने और उन्हें वैश्विक मानकों तक ऊपर उठाने के लिए कई प्रयास किए गए हैं।
अंत में, विधानसभा अध्यक्ष ए.एन. शमसीर ने विधेयक को ध्वनिमत के लिए रखा और इसे पारित कर दिया।




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