
देश में दो अलग-अलग स्थानों से छात्राओं की आत्महत्या की दुखद घटनाएं सामने आई हैं। केरल के कोच्चि और उत्तर प्रदेश के जौनपुर से आई इन खबरों ने शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कलमस्सेरी मेडिकल कॉलेज की छात्रा ने की आत्महत्या
कोच्चि के पास स्थित कलमस्सेरी के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की एक छात्रा अंबिली, शनिवार रात अपने छात्रावास के कमरे में फांसी पर लटकी हुई पाई गई। वह कासरगोड की रहने वाली थी और तीसरे वर्ष की छात्रा थी। रात करीब 11 बजे उसकी रूममेट ने उसे पंखे से लटका हुआ देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है और पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले ही अंबिली के माता-पिता उससे मिलने आए थे। हालांकि, आत्महत्या के पीछे का स्पष्ट कारण अभी तक सामने नहीं आया है।
सूत्रों के मुताबिक, अंबिली मानसिक तनाव और पढ़ाई से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रही थी, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने से पहले पुलिस अंबिली के परिजनों के बयान का इंतजार कर रही है।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय में बीएससी छात्रा की आत्महत्या
दूसरी घटना उत्तर प्रदेश के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से सामने आई है, जहां बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की अंतिम वर्ष की छात्रा शिवांगी मिश्रा ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली।
पुलिस के अनुसार, 1 अप्रैल की रात शिवांगी ने अपने मंगेतर से फोन पर बात करने के कुछ समय बाद फांसी लगा ली। वह लक्ष्मीबाई महिला छात्रावास के कमरा नंबर 35 में रहती थी और जलालपुर थाना क्षेत्र के कोतवालपुर गांव की निवासी थी। उसकी शादी 25 नवंबर को तय थी।
पुलिस अधीक्षक कौस्तुभ ने बताया कि मामले की जांच जारी है और छात्रा के आत्महत्या करने के पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक समर्थन छात्रों के जीवन में कितना महत्वपूर्ण है। शिक्षण संस्थानों को अब छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अधिक संवेदनशील और सजग होने की आवश्यकता है।




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