
पिछले पाँच वर्षों में विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के खिलाफ हिंसक हमलों की संख्या ने चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने लोकसभा में दिए एक लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2019 से अब तक ऐसे कुल 91 हमलों की घटनाएँ दर्ज की गईं हैं, जिनमें 30 छात्रों की जान चली गई।
इन हमलों में सबसे ज्यादा घटनाएँ कनाडा से सामने आईं, जहाँ 27 मामलों में 16 छात्रों की मौत हुई। रूस में भी 15 हमले हुए, हालाँकि इनमें कोई मौत नहीं हुई। ब्रिटेन में 12 और जर्मनी में 11 घटनाएँ दर्ज की गईं। अमेरिका में स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहाँ 9 हमले हुए और सभी में छात्रों की जान चली गई। चीन और किर्गिस्तान में एक-एक मामला सामने आया।
विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि भारतीय छात्रों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, विदेशी दूतावास और मिशन इन घटनाओं पर लगातार निगरानी रखते हैं और जरूरत पड़ने पर संबंधित देश की सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई की मांग की जाती है।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2024 तक कुल 20,77,158 एनआरआई भारतीय विदेशों में रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल हैं। यह आँकड़ा न केवल भारतीय युवाओं के वैश्विक शिक्षा में बढ़ते योगदान को दर्शाता है, बल्कि उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार की ज़िम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।




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