
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रसंघ चुनावों की प्रक्रिया एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुकी है। रविवार को विश्वविद्यालय की चुनाव समिति ने संभावित मतदाताओं की सूची जारी कर दी है। चुनाव समिति के अध्यक्ष विकास के अनुसार, इस बार कुल 7906 छात्र मतदाता के रूप में पंजीकृत किए गए हैं। इनमें 43 फीसदी महिला और 57 फीसदी पुरुष मतदाता हैं।
सोमवार से मतदाता सूची में सुधार और नामांकन की शुरुआत
चुनाव समिति ने बताया कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया सोमवार, 14 अप्रैल से शुरू होगी। छात्र सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक अपने विवरण में सुधार करवा सकेंगे। इसी दिन से छात्रसंघ चुनाव के लिए नामांकन फॉर्म भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
छात्र संगठनों ने तेज की तैयारी, तय हुई मीटिंग्स और बहस की तारीखें
चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। 17 और 21 अप्रैल को विभिन्न स्कूलों में जनरल बॉडी मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी, जबकि 22 अप्रैल को यूनिवर्सिटी स्तर पर जनरल बॉडी मीटिंग होगी।
इस बार प्रेसिडेंशियल डिबेट 23 अप्रैल की रात 8 बजे से आयोजित की जाएगी, जो जेएनयू के छात्रसंघ चुनाव की एक खास परंपरा मानी जाती है। 24 अप्रैल को चुनाव प्रचार पूरी तरह बंद रहेगा।
25 अप्रैल को मतदान, उसी रात से मतगणना
जेएनयू छात्रसंघ चुनाव 25 अप्रैल को दो पालियों में आयोजित किए जाएंगे। पहली पाली सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरी पाली में दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक चुनाव होगा। मतदान संपन्न होने के बाद उसी रात 9 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी और 28 अप्रैल को अंतिम परिणाम घोषित किए जाएंगे।
इस बार एक महीने की देरी से हो रहा है चुनाव
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार छात्रसंघ चुनाव लगभग एक महीने की देरी से हो रहे हैं। वर्ष 2024 में चुनाव मार्च के महीने में संपन्न हुए थे, जबकि इस बार अप्रैल के अंतिम सप्ताह में मतदान होगा। चुनाव में हो रही देरी को लेकर छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए थे, जिसके बाद अधिसूचना जारी कर चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
पिछले वर्ष का परिणाम: लेफ्ट गठबंधन का दबदबा
गौरतलब है कि पिछले साल 22 मार्च को जेएनयूएसयू चुनाव चार साल के अंतराल के बाद आयोजित हुए थे। उस चुनाव में यूनाइटेड लेफ्ट गठबंधन ने चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की थी, जबकि एक पद बिरसा अंबेडकर फुले छात्र संघ (BAPSA) ने हासिल किया था। धनंजय (यूनाइटेड लेफ्ट) अध्यक्ष, अविजीत घोष उपाध्यक्ष, प्रियांशी आर्य महासचिव और मो साजिद (BAPSA) संयुक्त सचिव चुने गए थे।
अब देखना यह होगा कि इस साल के चुनाव में कौन से छात्र संगठन छात्रों का विश्वास जीतकर आगे आते हैं।




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