
फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 134 वीं जयंती के अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर, शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी को पत्र लिखकर मांग की है कि देशभर के सभी केंद्रीय, राज्य व मानद विश्वविद्यालयों में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत, शिक्षा शास्त्री, अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता, पत्रकार व आधुनिक भारत के निर्माता बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर अम्बेडकर चेयर स्थापित किया जाए व अम्बेडकर स्टरडीज सेंटर खोले जाएं।
फोरम का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, इग्नू और राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय आदि किसी भी विश्वविद्यालय में अम्बेडकर चेयर नहीं है। साथ ही इन विश्वविद्यालयों में अम्बेडकर स्टरडीज सेंटर खोलने के साथ–साथ अम्बेडकर को विश्वविद्यालय के विभागों/कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में लगाने की भी मांग की गई है ताकि आज की युवा पीढ़ी डॉ. अम्बेडकर के विषय में जान सके। इसके अलावा फोरम ने बहुजन समाज के नायकों को भी कॉलेज व विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रमों में लगाने की मांग की है ताकि वर्तमान पीढ़ी को पता चल सके कि आजादी के आंदोलन में इनका भी योगदान रहा है ।
फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने विश्वविद्यालयों के विजिटर को लिखे पत्र में यह भी मांग की है कि वे केंद्रीय शिक्षामंत्री और यूजीसी को डॉ. अम्बेडकर चेयर स्थापित करने व डॉ. अम्बेडकर स्टरडीज सेंटर खोलने संबंधी सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों , राज्य व मानद विश्वविद्यालयों के उप कुलपति /कुलसचिव को एक सर्कुलर जारी कर यह निर्देश दिए जाए कि वे अपने यहाँ डॉ. अम्बेडकर चेयर व डॉ. अम्बेडकर स्टरडीज सेंटर खोले। उन्होंने स्टरडीज सेंटर व अम्बेडकर चेयर के लिए केंद्र सरकार से यूजीसी को इसके लिए अतिरिक्त अनुदान ( ग्रांट ) भी उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही इन विश्वविद्यालयों में डॉ. अम्बेडकर से संबंधित विषयों पर शोध कार्य हो ( रिसर्च वर्क ) जो देश की युवा पीढ़ी के लिए लाभदायक सिद्ध हो।
चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने विजिटर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और यूजीसी को लिखे पत्र में उन्हें यह भी बताया है कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी ने सदैव वंचित, शोषितों और पिछड़े वर्गों के हकों की लड़ाई लड़ी थी। आज उनके योगदान को आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है, इसके लिए आवश्यक है कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य व मानद विश्वविद्यालयों में डॉ. अम्बेडकर चेयर स्थापित हो और अम्बेडकर स्टरडीज सेंटर खोले जाए जिसमें विशेष रूप से डॉ.अम्बेडकर पर अनुसंधान कराया जाए।
डॉ. सुमन ने पत्र में लिखा कि डॉ.अम्बेडकर के विचारों को केवल किसी विशेष समुदायों से नहीं बल्कि समग्रता में समझने की जरूरत है, उनके विचारों में ना केवल समाज के पिछड़े, वंचितों के अधिकारों की बात है बल्कि महिलाओं की मुक्ति का संघर्ष भी चलाया और वैश्विक पटल पर उनके अधिकारों के लिए विधेयक भी लेकर आए । उन्होंने आगे यह भी कहा कि भारत में वर्षो की गुलामी झेल रही महिलाओं को उन देशों से पहले अधिकार मिले जो लंबे समय से स्वतंत्र थे। भारत ही एक मात्र ऐसा देश था जहां डॉ. अम्बेडकर के प्रयासों से महिलाओं को देश की आजादी के साथ ही अधिकार मिल गए थे। आज महिला संगठनों / शिक्षिकाओं को भी यह समझने की जरूरत है कि बाबा साहेब के विचारों को समाज में पहुंचाये और उनके योगदान और अध्ययन पर विशेष शोध व पाठ्यक्रमों में लगाया जाना चाहिए ताकि आज की युवा पीढ़ी उनके विषय में जानकर उसे आत्मसात कर सकें ।
डॉ. सुमन ने कहा है कि देशभर के विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है तो क्यों न राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शैक्षिक सत्र 2025 – 26 से विश्ववविद्यालयों / कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में अंबेडकर को पढ़ाया जाए ताकि आज की युवा पीढ़ी उनके विचारों व सिद्धान्तों को अपने जीवन में उतार सके और अपने बहुजन नायकों से प्रेरणा ले सके।




Add comment