
आगामी सत्र से इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, फार्मेसी और मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों के सभी छात्रों के लिए पर्यावरण विषय की पढ़ाई जरूरी कर दी गई है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने अपने अधीनस्थ सभी तकनीकी कॉलेजों को पत्र जारी कर यह निर्देश दिया है कि स्नातक पाठ्यक्रमों में पर्यावरण विषय को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
AICTE ने सभी राज्यों के शिक्षा सचिवों और तकनीकी कॉलेजों के निदेशकों को पत्र लिखते हुए बताया है कि यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत लिया गया है। इस निर्देश के अनुसार, सभी तकनीकी कॉलेजों को अपने यूजी पाठ्यक्रमों में पर्यावरण अध्ययन को आवश्यक रूप से जोड़ना होगा।
UGC द्वारा तैयार किया गया पर्यावरण पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के तहत पर्यावरण शिक्षा आधारित एक नया पाठ्यक्रम तैयार किया है। इस पाठ्यक्रम में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि फील्ड वर्क और केस स्टडी को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।
एक सेमेस्टर में एक क्रेडिट आवश्यक
स्नातक पाठ्यक्रम में कुल नौ विषयों को शामिल किया गया है, जिनमें से एक विषय 4 घंटे और बाकी छह-छह घंटे के होंगे, जिससे कुल 30 घंटे की क्लासरूम स्टडी होगी। यह कोर्स कुल चार क्रेडिट का होगा। एक सेमेस्टर में छात्रों को कम से कम एक क्रेडिट प्राप्त करना अनिवार्य होगा, जिसके लिए 30 घंटे की कक्षा शिक्षण और फील्ड वर्क आवश्यक होगा।
इस पर्यावरण शिक्षा पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, जैव विविधता का संरक्षण, जैव संसाधनों और जैव विविधता का प्रबंधन, वन एवं वन्य जीवन संरक्षण और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सम्मिलित किया गया है।




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