
भारत में 85 प्रतिशत से अधिक छात्रों और शिक्षकों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की उपलब्धता और इसकी बढ़ती मात्रा काफी अधिक और कभी-कभी भारी पड़ रही है। इसके बावजूद, 90 प्रतिशत से अधिक लोग यह भी महसूस करते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में एआई का प्रभाव सकारात्मक है।
यह जानकारी एक नए सर्वेक्षण में सामने आई है। यह सर्वेक्षण टर्नइटिन नामक वैश्विक शैक्षणिक संस्था द्वारा कराया गया है, जो शिक्षा में ईमानदारी और मूल्यता सुनिश्चित करने के क्षेत्र में कार्यरत है। इस सर्वेक्षण का संचालन इंग्लैंड की मार्केट रिसर्च फर्म वैनसन बॉर्न ने किया है।
इस अध्ययन में भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मैक्सिको, आयरलैंड और अमेरिका सहित छह देशों के कुल 3,500 छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक प्रशासकों की राय शामिल की गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 93 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि शिक्षा पर एआई का प्रभाव सकारात्मक है। यह आंकड़ा सर्वेक्षण में शामिल सभी देशों में सबसे अधिक है।
हालांकि, उतने ही लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि एआई की अत्यधिक उपलब्धता और जानकारी की भरमार उन्हें थोड़ा भ्रमित और बोझिल भी कर रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत के प्रतिभागी जहां एआई के प्रभाव को लेकर सबसे अधिक आशावादी हैं, वहीं वे इसके अत्यधिक उपयोग और आसान पहुंच से सबसे ज्यादा परेशान और चकित भी महसूस करते हैं।




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