
दिल्ली सरकार अब अपने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग का प्रशिक्षण देगी, ताकि वे पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन बनाने, पाठ्येतर गतिविधियों के लिए नए आइडिया खोजने और फोटो एडिटिंग जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों को आसानी से कर सकें।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के एक अधिकारी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य यह है कि शिक्षक तकनीक की मदद से समय लेने वाले दोहराव वाले कार्यों को तेजी से निपटा सकें और कक्षा में शिक्षण पर अधिक फोकस कर सकें।
100 कंप्यूटर विज्ञान शिक्षकों को मिलेगा एआई टूल्स का विशेष प्रशिक्षण
इस योजना के तहत लगभग 100 कंप्यूटर साइंस शिक्षकों को चुना जाएगा और उन्हें खास एआई टूल्स के उपयोग में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो इन कार्यों को सरल बनाने के लिए बनाए गए हैं। प्रशिक्षण के बाद ये शिक्षक ‘मास्टर ट्रेनर’ की भूमिका निभाएंगे और 50 चुने हुए सरकारी स्कूलों का दौरा कर अन्य शिक्षकों को एआई टूल्स के प्रभावी इस्तेमाल की ट्रेनिंग देंगे।
अधिकारी ने बताया, “हम केवल इस प्रोग्राम की शुरुआत नहीं कर रहे हैं, बल्कि शिक्षकों से फीडबैक भी लेंगे, ताकि यह जाना जा सके कि वे इन टूल्स का सही तरह से उपयोग कर पा रहे हैं या नहीं।”
AI शिक्षकों की मदद करेगा, उनकी जगह नहीं लेगा
उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में कुछ शिक्षक एआई को लेकर आशंकित थे, क्योंकि उन्हें डर था कि यह तकनीक कहीं उनकी नौकरी ही न ले ले। अधिकारी ने स्पष्ट किया, “इस पहल के ज़रिए हम उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि एआई उनकी जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनके सहायक के रूप में है। इसका मकसद शिक्षकों का गैर-शिक्षण कार्यभार कम करना है, ताकि वे पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकें।”
उन्होंने बताया कि शिक्षक अक्सर प्रेजेंटेशन बनाने, दृश्य सामग्री के लिए छवियों को एडिट करने और सांस्कृतिक या अन्य पाठ्येतर गतिविधियों के लिए विचार जुटाने में काफी समय खर्च करते हैं। यदि इन कार्यों में एआई सहायता दे सके, तो शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ जुड़ने और पाठों की गुणवत्ता सुधारने के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
कक्षा में इन एआई टूल्स का हो सकता है उपयोग
कुछ खास एआई टूल्स जैसे ‘Napkin’, जो टेक्स्ट को विजुअल्स में बदलता है, और ‘Gamma’, जो तेजी से पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन बनाने में मदद करता है, कक्षा में पेश किए जा सकते हैं।
इस तरह की पहल से दिल्ली के सरकारी स्कूलों में न केवल तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, बल्कि शिक्षकों को उनकी मुख्य जिम्मेदारी – यानी बच्चों को पढ़ाने – पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिलेगा।




Add comment