
आईआईटी खड़गपुर के मदनमोहन मालवीय हॉल स्थित छात्रावास में रविवार को बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र मोहम्मद आसिफ कमर का शव फांसी से लटका मिला। सिविल इंजीनियरिंग विभाग का यह छात्र बिहार के सिओहर जिले का निवासी था। पुलिस और संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि मामला प्रथम दृष्टया आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन जांच अभी जारी है।
पुलिस को मिले अहम सुराग
अधिकारियों के अनुसार, शनिवार रात से कमर का कमरा भीतर से बंद था। जब रविवार सुबह दरवाजा नहीं खुला, तो सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। शव बरामद करने के साथ ही पुलिस ने कहा कि कुछ सुराग हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। फिलहाल परिवार को सूचित कर दिया गया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लगता है, लेकिन हम हर पहलू से जांच कर रहे हैं।”
लगातार बढ़ते आत्महत्या के मामले: मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल
आईआईटी खड़गपुर में यह पहला मामला नहीं है। 20 अप्रैल को महासागर इंजीनियरिंग और नौसेना वास्तुकला विभाग के छात्र अनिकेत वाकर का शव उसके हॉस्टल के कमरे में लटका मिला था। इससे पहले 12 जनवरी को तीसरे वर्ष के छात्र शॉन मलिक की भी संदिग्ध परिस्थिति में मृत्यु हुई थी। जून 2024 में, देविका पिल्लई नामक छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है।
आईआईटी खड़गपुर की पहल
संस्थान ने मानसिक तनाव से जूझ रहे छात्रों की मदद के लिए चौबीसों घंटे काउंसलर की सुविधा उपलब्ध कराई है। हाल ही में हर छात्र के कमरे के बाहर एक बारकोड भी लगाया गया है, जिसे स्कैन कर छात्र तत्काल काउंसलिंग सेवा प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यवाहक निदेशक अमित पात्रा ने पहले बताया था, “ऐसी त्रासदियों के पीछे के कारणों को जानने के लिए एक समिति बनाई जा रही है, जो तीन दिनों में अपनी सिफारिशें देगी।” उन्होंने कहा, “हमारे छात्रों की भलाई, खुशहाली और शैक्षणिक सफलता हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। वे हमारे अपने बच्चे हैं।”




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