
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) प्रयागराज के निदेशक प्रो. आर.एस. वर्मा ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे ने संस्थान और शैक्षिक जगत को चौंका दिया है। इस्तीफे के पीछे उन्होंने व्यक्तिगत कारण बताए हैं, लेकिन इसके पीछे चल रहे विवादों को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं।
हाल ही में संस्थान के औद्योगिक क्षेत्र को लेकर हुए विवाद में कुछ उद्यमियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से प्रो. वर्मा की शिकायत की थी। इससे पहले उनकी शैक्षणिक अर्हता को लेकर भी सवाल उठाए जा चुके थे।
जनवरी 2022 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्रो. रमाशंकर वर्मा को पांच वर्ष के लिए एमएनएनआईटी का निदेशक नियुक्त किया था। इससे पहले वे आईआईटी मद्रास के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में कार्यरत थे। लेकिन कार्यकाल खत्म होने से डेढ़ वर्ष पहले ही उन्होंने पद छोड़ दिया।
औद्योगिक क्षेत्र का विवाद:
संस्थान के औद्योगिक क्षेत्र में संचालित करीब 50 कारखानों को एमएनएनआईटी प्रशासन ने खाली करने का नोटिस जारी किया था। बताया गया कि वहां 68 शेड हैं, जिनमें से अधिकांश अब भी सक्रिय हैं और 10,000 से अधिक लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार में लगे हैं। कारखानों को हटाने के फैसले के खिलाफ स्थानीय भाजपा जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा मंत्री से शिकायत की थी।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि:
प्रो. वर्मा फतेहपुर जनपद के अशोथर क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने 1975 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इविंग क्रिश्चियन कॉलेज से बीएससी किया और 1977 में एमएससी के दौरान डायमंड जुबली छात्रावास में रहे। 1978 में वे एमएलबी मेडिकल कॉलेज, झांसी में डिमॉन्स्ट्रेटर पद पर नियुक्त हुए और 2004 में आईआईटी मद्रास पहुँचे।
उनके इस्तीफे के बाद अब एमएनएनआईटी में नए निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।




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