
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को बड़ी राहत देते हुए उनकी अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रोफेसर को कुछ मामलों में ऑनलाइन पोस्ट, लेखन या बयानबाजी से परहेज़ करना होगा।
कोर्ट की टिप्पणी: अभिव्यक्ति की आज़ादी बरकरार, लेकिन सीमाएं भी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि प्रोफेसर महमूदाबाद के बोलने और अभिव्यक्ति के अधिकार पर कोई रोक नहीं है, लेकिन उन्हें उन मामलों से संबंधित कोई भी ऑनलाइन सामग्री पोस्ट करने या मौखिक टिप्पणी करने से फिलहाल रोक दिया गया है, जिनकी जांच जारी है।
जांच की निगरानी में सुप्रीम कोर्ट
हरियाणा सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि इस मामले में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, और प्रोफेसर महमूदाबाद को जांच में शामिल किया गया है। कोर्ट ने SIT से अगली सुनवाई पर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
साथ ही, अदालत ने हरियाणा पुलिस से यह भी पूछा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर जारी नोटिस का क्या जवाब दिया गया है। NHRC ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा था कि गिरफ्तारी की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं।
FIR और जांच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि प्रोफेसर के खिलाफ दो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं और जांच उन्हीं पर केंद्रित रहनी चाहिए। अदालत ने हरियाणा पुलिस से कहा कि वह जांच में “इधर-उधर न भटके” और “सटीक तथ्यों व उपकरणों की तलाश” करे।
भारत में आतंकी घटनाओं और सुरक्षा बलों पर बयान देने पर रोक
कोर्ट ने प्रोफेसर महमूदाबाद को यह भी निर्देश दिया कि वह भारत में हुए आतंकवादी हमलों या भारतीय सशस्त्र बलों की प्रतिक्रिया के बारे में कोई सार्वजनिक टिप्पणी या राय व्यक्त न करें।
अगली सुनवाई में SIT रिपोर्ट होगी अहम
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई में SIT की रिपोर्ट और NHRC के नोटिस पर हरियाणा पुलिस की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।




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