
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय को ‘एक आपदा’ करार देते हुए उस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्था को अब तक पांच बिलियन डॉलर से अधिक की मदद दी जा चुकी है, फिर भी यहूदी विरोध और कुप्रबंधन जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वे बहुत बुरी तरह से काम कर रहे हैं। हर बार जब वे लड़ते हैं, तो वे 250 मिलियन डॉलर और गंवा देते हैं।”
ट्रेड स्कूलों को बढ़ावा देने की वकालत
ट्रंप ने पारंपरिक कॉलेजों के बजाय ट्रेड स्कूलों को बढ़ावा देने की बात भी की। उन्होंने कहा, “मेरे पास आकर हर कोई यही बात कह रहा है कि उन्हें ट्रेड स्कूलों का विचार पसंद है।” उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे संस्थानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक तकनीकी विषयों पर केंद्रित किया जा सकता है।
विदेशी छात्रों और वामपंथी कट्टरता पर सवाल
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में पढ़ने आने वाले कई विदेशी छात्र “कट्टरपंथी वामपंथियों द्वारा पैदा किए गए उपद्रवी” होते हैं। उन्होंने यह भी कहा, “हम शॉपिंग सेंटरों में विस्फोट नहीं देखना चाहते, हम आपके जैसे दंगे नहीं देखना चाहते।”
विदेशी छात्रों की संख्या पर उठाए सवाल
पूर्व राष्ट्रपति ने हार्वर्ड में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हार्वर्ड को हमें अपनी सूचियां दिखानी ही होंगी। उनके यहां लगभग 31 प्रतिशत विदेशी छात्र पढ़ते हैं। हम जानना चाहते हैं कि वे छात्र कहां से आते हैं और क्या वे उपद्रवी हैं।”
कट्टरपंथी क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को लेकर चिंता
ट्रंप ने आरोप लगाया कि हार्वर्ड में दुनिया के कुछ बेहद कट्टरपंथी क्षेत्रों से छात्र आते हैं। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि वे हमारे देश में उपद्रव करें। मैंने हाल ही में यूके से एक छात्र का मामला देखा, जो हार्वर्ड लौटना चाहता था, लेकिन मैं उसका पासपोर्ट देखना चाहता हूं।”
विदेशी छात्रों की संख्या घटाने की मांग
उन्होंने यह भी कहा कि हार्वर्ड में विदेशी छात्रों की संख्या घटाकर अधिकतम 15 प्रतिशत कर दी जानी चाहिए। ट्रंप ने सवाल उठाया, “कोई दूसरा देश हार्वर्ड में निवेश नहीं कर रहा, फिर 31 प्रतिशत विदेशी छात्र क्यों?”




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