
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), द्वारका में फीस वृद्धि को लेकर चल रहे विवाद में अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जिन छात्रों के नाम स्कूल ने फीस न जमा करने के कारण हटा दिए थे, उन्हें पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते उनके अभिभावक 2024-25 सत्र की बढ़ी हुई फीस का 50% भुगतान करें। इसके अलावा, उन्हें मूल शुल्क पूरी तरह जमा करना होगा।
यह आदेश 16 मई, 2025 को जस्टिस विकास महाजन द्वारा पारित किया गया था, जिसकी जानकारी 29 मई को सार्वजनिक की गई। यह मामला 100 से अधिक अभिभावकों की याचिका से जुड़ा है, जिसमें लगातार फीस वृद्धि और छात्रों को स्कूल से निकाले जाने का विरोध किया गया था।
बढ़ी हुई फीस पर केवल 50% देनी होगी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 50 प्रतिशत की छूट केवल बढ़ी हुई राशि पर लागू होगी, मूल फीस पूरी चुकानी अनिवार्य है। डीपीएस, द्वारका में पिछले कुछ वर्षों से फीस वृद्धि को लेकर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद जारी है।
अभिभावकों का आरोप: लगातार और अनाधिकृत फीस वृद्धि
अभिभावकों के अनुसार, स्कूल ने 2020 से 2025 के बीच लगातार फीस में वृद्धि की, जो क्रमशः 20%, 13%, 9%, 8%, और 7% रही। उनका आरोप है कि यह वृद्धि बिना वैधानिक अनुमति के की गई और इसके चलते छात्रों को मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
छात्रों ने हाईकोर्ट को लिखी चिट्ठी
मामले ने तब तूल पकड़ा जब पांच छात्रों ने हाईकोर्ट को चिट्ठी लिखकर शिकायत की कि उन्हें बढ़ी हुई फीस न भरने के कारण कक्षा में नहीं जाने दिया गया और लाइब्रेरी में बैठने को मजबूर किया गया। हाईकोर्ट ने स्कूल के इस व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि शिक्षा को व्यापार बनाने और छात्रों को संपत्ति की तरह देखने का रवैया निंदनीय है।




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