
पश्चिम बंगाल सचिवालय नबन्ना की ओर मार्च कर रहे लगभग 50 बेरोजगार शिक्षकों को पुलिस ने दो अलग-अलग स्थानों से हिरासत में ले लिया। ये सभी शिक्षक ‘डिजर्विंग टीचर्स राइट्स फोरम’ के बैनर तले स्थायी नियुक्ति की मांग और राज्य सरकार द्वारा दोबारा परीक्षा देने के निर्देशों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों ने सियालदह स्टेशन और एस्प्लेनेड से मार्च शुरू करने की कोशिश की, लेकिन पहले से तैनात पुलिस बल ने उन्हें वहीं रोक दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई।
फोरम के एक सदस्य ने कहा, “हम सिर्फ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलना चाहते थे ताकि अपनी स्थिति और मांगों को उनके सामने रख सकें, लेकिन हमें रोक दिया गया।”
प्रतीकात्मक विरोध के रूप में कुछ प्रदर्शनकारियों ने अपनी शर्ट उतार दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर यातायात बाधित करने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश का आरोप लगाते हुए उन्हें हिरासत में लिया। मध्य कोलकाता की उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया, और प्रदर्शन को लेकर पुलिस की ओर से पहले से अलर्ट था।
पुलिस ने आसपास के इलाकों में आईडी चेकिंग की और यहां तक कि सार्वजनिक बसों में छिपे प्रदर्शनकारियों की तलाश की।
फोरम ने पहले ही घोषणा की थी कि वे सियालदह से नबन्ना तक मार्च करेंगे, और कुछ सदस्य शर्ट उतारकर यह जताना चाहते थे कि वे दोबारा परीक्षा के बजाय तत्काल बहाली को लेकर कितने गंभीर हैं।
बता दें कि ये शिक्षक पिछले 22 दिनों से पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग के मुख्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। यह विरोध सुप्रीम कोर्ट के 3 अप्रैल 2025 के उस फैसले के बाद तेज हुआ है, जिसमें 2016 की एसएससी भर्ती के तहत हुई 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की बात कही थी।




Add comment