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राष्ट्रीय भाषा होने के नाते हिंदी में हो सारे सरकारी काम, हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर 11 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने सरकारी कामकाज में हिंदी को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य के शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी कार्य हिंदी में किए जाने चाहिए, क्योंकि यह राज्य की अधिकांश जनता की भाषा है और इसे “राष्ट्रीय भाषा” माना जाता है।

ढांडा ने कहा, “हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। हमें अंग्रेज़ी में काम क्यों करना चाहिए? मैं अंग्रेजी नहीं जानता… हालांकि कुछ हद तक समझ सकता हूँ… लेकिन हमारे राज्य में 90% लोग अंग्रेजी से बहुत दूर हैं।”

कुरुक्षेत्र में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकारी पत्राचार हिंदी में हो, तो आम लोगों को इससे काफी लाभ होगा। उनके अनुसार, जब आधिकारिक संवाद अंग्रेज़ी में होता है, तो अधिकांश लोग उसे समझ ही नहीं पाते, और सिर्फ़ 5-7% लोगों के लिए 90-95% जनता के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका विभाग अब सभी कार्य हिंदी में करेगा ताकि सभी को यह समझ में आए कि सरकार क्या कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि हरियाणा में अधिकतर प्रशासनिक कार्य हिंदी में ही हों।

बाद में उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा: “हिंदी हमारी मातृभाषा है और हमारी पहचान भी। हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व है। मेरा प्रयास रहेगा कि हिंदी को हर क्षेत्र में सम्मान और प्राथमिकता मिले और इसे हर जगह लागू किया जाए।”

विपक्ष की प्रतिक्रिया: समर्थन और चेतावनी दोनों
इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा: “मैं महिपाल ढांडा से सहमत हूं कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। हमें इस पर गर्व है। अगर कोई अंग्रेज़ी नहीं जानता, तो इसमें शर्म की कोई बात नहीं है।”

हालांकि, सुरजेवाला ने मंत्री के बयान के एक हिस्से पर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि एक शिक्षा मंत्री का यह कहना कि युवाओं को अंग्रेज़ी सीखने की ज़रूरत नहीं है, राज्य और छात्रों के भविष्य के लिए चिंताजनक हो सकता है।

“अगर हम अपनी अगली पीढ़ी को केवल हिंदी तक सीमित कर देंगे, तो हम उन्हें वैश्विक अवसरों से वंचित कर देंगे। अंग्रेजी सीखने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए और न ही उसका विरोध किया जाना चाहिए।”

सुरजेवाला ने यह भी कहा कि अंग्रेज़ी न केवल रोजगार, बल्कि तकनीक, विज्ञान और वैश्विक संवाद का प्रमुख माध्यम बन चुकी है, खासकर दक्षिण भारत में जहाँ यह एक ‘लिंक लैंग्वेज’ की भूमिका निभाती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि गुरुग्राम में लाखों लोग कॉल सेंटर और आईटी सेक्टर में काम करते हैं, जिनमें अधिकतर राज्य से बाहर के होते हैं। इन नौकरियों के लिए अंग्रेज़ी में दक्षता आवश्यक होती है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हमें अपने युवाओं को हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी में भी प्रशिक्षित करना चाहिए। यह राज्य और उनके भविष्य – दोनों के लिए ज़रूरी है।”

महिपाल ढांडा का हिंदी को बढ़ावा देने का प्रस्ताव स्थानीय संदर्भ में सराहनीय हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा नीति को संतुलन और व्यावहारिकता के साथ अपनाना होगा। हिंदी को सम्मान देना जरूरी है, पर अंग्रेज़ी को नकारना वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में युवाओं के विकास के अवसरों को सीमित कर सकता है।

 

Asmita Sarkar

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