
जब प्राथमिक विद्यालयों की दीवारें उम्मीदों से सजने लगें, शिक्षक डायरी और टैबलेट के साथ कक्षा में प्रवेश करें, और स्मार्ट क्लास, गणित किट व लाइब्रेरी की किताबें बच्चों की आंखों में नई चमक भरने लगें—तब यह साफ हो जाता है कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था निर्णायक बदलाव के दौर से गुजर रही है। ‘निपुण भारत मिशन’ के अंतर्गत राज्य सरकार की योजनाएं अब ठोस परिणाम दे रही हैं।
राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण में यूपी का शानदार प्रदर्शन
हाल ही में आयोजित परख – राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2024 ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों पर मुहर लगा दी। कक्षा 3 के विद्यार्थियों ने भाषा में 68% और गणित में 64% अंक अर्जित किए, जो कि राष्ट्रीय औसत (64% और 60%) से अधिक है। यह प्रदर्शन वर्ष 2017 की तुलना में भी बेहतर है, जब भाषा में 58% और गणित में 59% औसत था।
यह सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि ‘निपुण भारत मिशन’ और ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए गए सुनियोजित प्रयासों का परिणाम है।
‘निपुण भारत मिशन’: प्राथमिक शिक्षा को नई दिशा
राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक बालवाटिका से कक्षा 2 तक के बच्चों को पढ़ना, लिखना और गणना में दक्ष बनाना है। इसके लिए हर विद्यालय में गणित किट, प्रिंटरिच सामग्री, टीएलएम, लाइब्रेरी बुक्स, शिक्षक डायरी और ‘तालिका’ जैसे संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। 4.53 लाख से अधिक शिक्षकों और शिक्षामित्रों को चार दिवसीय ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण से दक्ष किया गया। शिक्षकों को निरंतर शैक्षिक सहयोग मिल रहा है ताकि कक्षा शिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
शिक्षक संकुल, मेंटर और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की मजबूत व्यवस्था
प्रत्येक विकासखंड में 5 ARP, प्रत्येक जिले में 3 SRG और डायट स्तर पर मेंटर्स के माध्यम से सहयोगात्मक पर्यवेक्षण प्रणाली विकसित की गई है। इनकी जिम्मेदारी है कि वे हर माह दर्जनों विद्यालयों का मूल्यांकन और शैक्षिक सहयोग सुनिश्चित करें।
नवीन मूल्यांकन प्रणाली और ‘निपुण विद्यालय’ की मान्यता
‘तालिका’, स्पॉट असेसमेंट, निपुण एसेसमेंट टेस्ट जैसे उपकरणों से बच्चों के अधिगम स्तर का आकलन किया जा रहा है। 2024-25 सत्र में 48,061 विद्यालयों को ‘निपुण विद्यालय’ के रूप में मान्यता दी गई है। परख सर्वेक्षण 2024 में उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के 8,865 विद्यालयों के 2.5 लाख से अधिक छात्रों और 30,817 शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
डिजिटल शिक्षा में अग्रणी बनता उत्तर प्रदेश
राज्य में 31,600 स्मार्ट क्लास और 5,568 ICT लैब स्थापित की जा चुकी हैं। 2.61 लाख टैबलेट शिक्षकों को वितरित किए गए हैं। लखनऊ में एक अत्याधुनिक डिजिटल स्टूडियो की स्थापना की गई है। सभी शिक्षकों और अधिकारियों को डिजिटल शिक्षा आधारित विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।
STEM शिक्षा और राष्ट्रीय आविष्कार अभियान
विज्ञान और नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 88,500 छात्रों को एक्सपोज़र विजिट कराई गई। 150 छात्रों को राज्य से बाहर विजिट पर भेजा जाएगा। 18 मंडलों में साइंस पार्क की स्थापना को स्वीकृति मिली है। विज्ञान क्विज़ और प्रदर्शनियों का आयोजन भी किया गया है।
पर्यावरण, खेल और जीवन कौशल पर भी फोकस
‘Eco Clubs for Mission LiFE’ की स्थापना से छात्रों में पर्यावरणीय चेतना विकसित हो रही है। खेल सामग्री के लिए प्राथमिक विद्यालयों को ₹5,000 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को ₹10,000 बजट प्रदान किया गया है।
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था अब सिर्फ कक्षाओं तक सीमित न होकर स्मार्ट, समावेशी और परिणामोन्मुखी बन रही है। यह बदलाव केवल संख्यात्मक नहीं, बल्कि गुणात्मक सुधार की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है, जो पूरे देश के लिए अनुकरणीय बनता जा रहा है।




Add comment