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इंदौर में बिजली गुल होने के बावजूद नीट यूजी परीक्षा पर नहीं पड़ा असर, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एनटीए का दावा

नीट यूजी 2025 परीक्षा के दौरान इंदौर के कई परीक्षा केंद्रों पर एक घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायत पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि इस घटना से छात्रों के प्रदर्शन पर कोई विशेष असर नहीं पड़ा। मेडिकल डायलॉग्स की रिपोर्ट के अनुसार, एनटीए ने कोर्ट में एक स्वतंत्र समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया है कि भले ही 18 केंद्रों पर बिजली बाधित रही, लेकिन वहां पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी मौजूद थी, जिससे छात्र परीक्षा बिना रुकावट के जारी रख सके।

दरअसल, इंदौर और उज्जैन के कई छात्रों ने याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें यह आरोप लगाया गया कि बिजली की कमी के चलते उन्हें मोमबत्तियों और इमरजेंसी लाइट्स के सहारे परीक्षा देनी पड़ी, जिससे वे तनाव में आ गए। हालांकि, 23 जून को हुई सुनवाई में एनटीए की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि यदि प्रकाश की वास्तव में इतनी गंभीर कमी होती, तो छात्रों द्वारा हल किए गए प्रश्नों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिलती। उन्होंने बताया कि प्रभावित केंद्रों में से 11 छात्रों ने 720 में से 600 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा पर वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा।

एनटीए ने यह भी बताया कि इंदौर के 49 परीक्षा केंद्रों में से 18 और उज्जैन के 6 केंद्रों पर बिजली बाधा की सूचना मिली थी, जिससे लगभग 2,000 छात्र प्रभावित हुए। हालांकि, इंदौर से परीक्षा देने वाले 27,000 में से सिर्फ 75 छात्र ही कोर्ट पहुंचे। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित और अप्रभावित दोनों तरह के केंद्रों में छात्रों ने औसतन 119 से 127 प्रश्न हल किए, जो प्रदर्शन में कोई असामान्यता नहीं दर्शाता। एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति स्वतंत्र विशेषज्ञों से बनी थी, जिनका एनटीए से कोई संबंध नहीं था।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि अब तक 24 केंद्रों से 100 से अधिक छात्रों ने बिजली संकट और बैकअप न होने की शिकायत की है। उन्होंने कहा कि परीक्षा से ठीक एक दिन पहले, 3 मई को भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भारी बारिश, तूफान और तेज हवाओं की चेतावनी दी थी, बावजूद इसके संबंधित प्रबंधन द्वारा पर्याप्त पावर बैकअप की व्यवस्था नहीं की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि परीक्षा के दौरान कुछ केंद्रों में प्रकाश स्तर 4 से घटकर 1 तक आ गया था, जिससे छात्रों को प्रश्न पत्र पढ़ने और हल करने में कठिनाई हुई।

जब कोर्ट ने यह पूछा कि क्या कभी आंशिक रूप से दोबारा परीक्षा आयोजित की गई है, तो एनटीए की ओर से तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट का एक पुराना उदाहरण दिया, जिसमें विशेष परिस्थितियों में पुनः परीक्षा की अनुमति दी गई थी। हालांकि, उन्होंने इस मामले में पुनः परीक्षा का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा करना 27,000 अन्य छात्रों के साथ अन्याय होगा और असमान परीक्षा की स्थिति पैदा करेगा।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि बिजली कटौती के दौरान की CCTV फुटेज क्यों सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने कहा कि छात्रों के तनाव और मानसिक स्थिति को केवल आँकड़ों से नहीं मापा जा सकता। इस पर एनटीए की ओर से जवाब दिया गया कि बिजली कटौती एक स्वीकार्य तथ्य है, लेकिन मुख्य प्रश्न यह है कि क्या इसने छात्रों के प्रदर्शन को प्रभावित किया।

तुषार मेहता ने तर्क दिया कि जिन छात्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, वे भी केवल इस डर के कारण कोर्ट पहुंचे हैं कि वे शायद और बेहतर कर सकते थे। उन्होंने कोर्ट से यह आग्रह भी किया कि बाकी 27,000 छात्रों के हितों को ध्यान में रखा जाए, जिन्हें दोबारा परीक्षा के लिए बाध्य करना अनुचित होगा।

इस पूरे मामले पर अब अगली सुनवाई 30 जून 2025 को होगी। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या प्रभावित छात्रों के लिए पुनः परीक्षा की कोई आवश्यकता है या नहीं। यह मामला अब केवल तकनीकी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि लाखों छात्रों की उम्मीदों और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता का भी बड़ा प्रश्न बन चुका है।

 

 

Asmita Sarkar

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