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NEET UG पर एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोबारा होगी परीक्षा, काउंसलिंग पर भी रोक

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने नीट यूजी 2025 परीक्षा में बिजली कटौती से प्रभावित इंदौर और उज्जैन के छात्रों को राहत देते हुए दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने माना कि छात्रों की कोई गलती नहीं थी, लेकिन उन्हें अंधेरे में परीक्षा देने को मजबूर होना पड़ा, जिससे उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ।

जल्द कराई जाए दोबारा परीक्षा, उसी के आधार पर तय हो रैंक
हाईकोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द नीट यूजी 2025 की दोबारा परीक्षा कराए और छात्रों की रैंकिंग इसी परीक्षा के परिणामों के आधार पर तय की जाए। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पुनः परीक्षा केवल उन्हीं छात्रों के लिए होगी जिन्होंने 3 जून 2025 तक याचिका दायर की थी। इसके बाद याचिका दायर करने वाले छात्र इसमें शामिल नहीं हो सकेंगे।

काउंसलिंग टली, अब नए नतीजों के बाद शुरू होगी प्रक्रिया
नीट यूजी 2025 की काउंसलिंग प्रक्रिया, जो पहले 1 जुलाई से शुरू होने वाली थी, अब स्थगित कर दी गई है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, अब यह प्रक्रिया दोबारा परीक्षा के परिणाम आने के बाद शुरू की जाएगी। इसका असर देशभर के 12 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों पर पड़ेगा।

4 मई को बिजली कटौती ने बिगाड़ा परीक्षा का माहौल
छात्रों ने आरोप लगाया था कि 4 मई को हुई परीक्षा के दौरान कई परीक्षा केंद्रों पर बिजली चली गई थी। कई जगह जनरेटर भी काम नहीं कर रहे थे, जिससे परीक्षार्थियों को अंधेरे में परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। शिकायतों में बताया गया कि न तो कोई अतिरिक्त समय दिया गया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

इंदौर के आईएलवीए स्कूल, श्री वैष्णव एकेडमी और माधव कॉलेज जैसे परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा दे रहे कई छात्र इस स्थिति से प्रभावित हुए। करीब 200 छात्रों ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

एनटीए ने दी सफाई, लेकिन कोर्ट ने छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाया
एनटीए की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि कई केंद्रों पर इन्वर्टर, टॉर्च और मोमबत्तियों जैसी वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी, और कुछ छात्रों ने तो 600 से अधिक अंक भी हासिल किए हैं। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने माना कि सभी छात्रों को समान परीक्षा परिस्थितियां मिलनी चाहिए थीं, और कई छात्रों को बिना किसी गलती के नुकसान उठाना पड़ा है। इसलिए दोबारा परीक्षा कराना न्यायोचित है।

 

Asmita Sarkar

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