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बेंगलुरु यूनिवर्सिटी के दलित शिक्षकों ने कुलपति को लिखा पत्र, भेदभाव और पदोन्नति में अनदेखी का लगाया आरोप

बेंगलुरु यूनिवर्सिटी के दलित समुदाय से संबंधित शिक्षकों ने एक संयुक्त पत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन पर जातिगत भेदभाव और प्रशासनिक पदों की नियुक्ति में पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिक्षकों ने पत्र में लिखा है कि वे शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों में भी बराबरी से भागीदारी निभाते रहे हैं। इसके बावजूद, उन्हें वैधानिक और निर्णयात्मक पदों से वंचित रखा जा रहा है और केवल नाममात्र की ‘स्टेवार्डशिप’ दी जाती है, जिसमें कोई निर्णायक अधिकार नहीं होता।

प्रमुख आरोप:
– जातिगत भेदभाव के चलते वैधानिक पदों की नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं।
– अतिरिक्त कार्यभार के बावजूद एलिवड लीव (EL) और वित्तीय लाभ नहीं दिए जा रहे।
– कई बार प्रशासन को लिखित/मौखिक रूप से अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं।

शिक्षकों की मांगें:
– निष्पक्ष और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया, जिससे सभी को बराबरी का मौका मिले।
– प्रशासनिक कार्यों के लिए वित्तीय लाभ और उचित अवकाश की व्यवस्था।
– दलित शिक्षकों को निर्णयात्मक और प्रभावशाली पदों पर भी प्रतिनिधित्व मिले।
– सभी शिक्षकों के लिए सम्मान, गरिमा और समान अवसरों का वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस शिकायत पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह मामला अब शिक्षकों और छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है, और उम्मीद की जा रही है कि विश्वविद्यालय इस पर गंभीरता से विचार करेगा।

Asmita Sarkar

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