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NCERT की किताब में शामिल हुआ भारत का वैज्ञानिक गौरव और कोरोना काल की उपलब्धियां, नई साइंस बुक ‘क्यूरियोसिटी’ तैयार

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 के लिए तैयार की गई अपनी नई विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘क्यूरियोसिटी’ में भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए प्रयासों और भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को प्रमुखता से शामिल किया है।

अब छात्र इस किताब में कोरोना काल में भारत की हेल्थकेयर क्रांति, ‘मेक इन इंडिया’ वैक्सीन मिशन, और कोविड-19 वैक्सीन निर्माण में भारत की भूमिका के बारे में पढ़ सकेंगे। उल्लेखनीय है कि भारत ने न केवल अपने नागरिकों को वैक्सीन उपलब्ध कराई, बल्कि कई देशों को वैक्सीन भेजकर लाखों लोगों की जान बचाई।

वैज्ञानिक योगदान और स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस
पुस्तक में रोटावायरस वैक्सीन के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले डॉ. एम. के. भान (पूर्व सचिव, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी) के कार्यों का विशेष उल्लेख है। उन्होंने स्वदेशी नवाचार, बच्चों में डायरिया की रोकथाम, और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया था।

NEP 2020 और NCF 2023 के अनुरूप नई शिक्षा सामग्री
‘क्यूरियोसिटी’ पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के आधार पर तैयार की गई है। इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान के साथ-साथ पृथ्वी विज्ञान को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। साथ ही, यह छात्रों में पर्यावरणीय चेतना, नैतिक मूल्यों और भारत की वैज्ञानिक परंपराओं को समझने में भी मदद करती है।

भारत की प्राचीन वैज्ञानिक धरोहर से परिचय
– भारत में वैक्सीनेशन की ‘वैरियोलाइज़ेशन’ नामक पारंपरिक पद्धति का उल्लेख किया गया है, जो चेचक से बचाव में प्रयोग होती थी।
– प्राचीन दार्शनिक आचार्य कणाद की परमाणु सिद्धांत की अवधारणा को भी समझाया गया है।
– चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, और आयुर्वेदिक ग्रंथों में दवाओं और मिश्र धातुओं के प्रयोग पर जानकारी दी गई है।

भास्कराचार्य, इसरो और आधुनिक भारत का विज्ञान
भास्कराचार्य-2 की खगोलशास्त्र और गणित में दी गई गहरी समझ को भी पुस्तक में स्थान मिला है। उन्होंने 12वीं सदी में ही बताया था कि पृथ्वी अन्य पिंडों को आकर्षित करती है।

उत्तरायण और दक्षिणायन की खगोलीय स्थितियों की भी व्याख्या की गई है।

ISRO की उपलब्धियां और महान वैज्ञानिकों का परिचय
पुस्तक में छात्रों को भारत के अंतरिक्ष अभियान जैसे चंद्रयान-1, चंद्रयान-2, और आदित्य एल-1 मिशन की जानकारी भी दी गई है। इसके अलावा कृत्रिम उपग्रहों की भूमिका, जैसे कि मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक अनुसंधान में उनके उपयोग को भी शामिल किया गया है।

भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान पर आधारित खंड में छात्रों को जानने को मिलेगा:
असीमा चटर्जी – मलेरिया की दवा विकसित करने वाली प्रसिद्ध रसायनशास्त्री
मेघनाद साहा – सुप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी और खगोलविद
डॉ. कमल रणदिवे – कैंसर रिसर्च में अग्रणी महिला वैज्ञानिक

यह नई पुस्तक छात्रों को विज्ञान के प्रति उत्सुकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भारतीय वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक आधुनिक प्रयास है।

Asmita Sarkar

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