
दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने अपनी बैठक में कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक और अवसंरचनात्मक प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की। इनमें सबसे चर्चित फैसला स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम से पाकिस्तान, इस्लाम और चीन पर आधारित शोधपत्रों को हटाने का था। इस संशोधन को पहले ही 5 जून को शैक्षणिक परिषद से स्वीकृति मिल चुकी थी, हालांकि यह निर्णय विश्वविद्यालय के भीतर विरोध के स्वर के बीच लिया गया।
कार्यकारी परिषद के सदस्य मिथुराज धुसिया ने इन बदलावों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई पाठ्यक्रमों में बदलाव शैक्षणिक परिषद में लाने से पहले ही कर दिए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और अकादमिक प्रक्रिया की अनदेखी हो रही है।
प्रो. रजनी अब्बी बनीं दक्षिणी परिसर की निदेशक
कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में प्रो. रजनी अब्बी को दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर का नया निदेशक नियुक्त करने की पुष्टि भी की गई।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्नातक के चौथे वर्ष को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो शैक्षणिक सत्र 2025–26 से शुरू होगा। उन्होंने अनुमान जताया कि 60% से अधिक छात्र इस वैकल्पिक चौथे वर्ष को चुन सकते हैं।
संकाय और संसाधनों पर ज़ोर
शिक्षक संकाय की उपलब्धता को लेकर उठी चिंताओं का जवाब देते हुए कुलपति ने स्पष्ट किया कि चौथे वर्ष की कक्षाएं केवल नियमित शिक्षक ही संचालित करेंगे, जबकि अतिथि शिक्षक जूनियर स्तर की पढ़ाई में सहायक भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा, नियमित शिक्षकों को अतिरिक्त कक्षाएं लेने पर उचित पारिश्रमिक भी प्रदान किया जाएगा।
डिजिटलीकरण और तकनीकी उन्नयन
कुलपति ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में 65.71 करोड़ रुपये की लागत से वाई-फाई नेटवर्क का बड़ा उन्नयन किया गया है। साथ ही, पुस्तकालयों का पूर्ण डिजिटलीकरण भी पूरा कर लिया गया है, जिससे छात्र अब दो लाख से अधिक ई-पुस्तकों और जर्नल्स तक 24×7 ऑनलाइन पहुंच प्राप्त कर सकते हैं।
उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
प्रो. सिंह ने सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को स्टार्टअप इनक्यूबेटर स्थापित करने और छात्रों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए Section-8 कंपनी पंजीकृत करने की सलाह भी दी, ताकि छात्रों को नवाचार और व्यावसायिक कौशल में नए अवसर मिल सकें।




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