
यदि आप रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय रेलवे ने अपनी भर्ती परीक्षा के नियमों में एक बड़ा और संवेदनशील बदलाव किया है। अब परीक्षार्थी धार्मिक प्रतीकों जैसे बिंदी, कलावा, पगड़ी आदि पहनकर भी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
पहले उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्रों में किसी भी प्रकार के धार्मिक चिन्हों को हटाने के लिए कहा जाता था, जिससे कई बार विवाद और असहमति की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। लेकिन अब रेलवे ने इस नियम में संशोधन करते हुए इसकी औपचारिक अनुमति दे दी है।
‘सेक्युलर गाइडलाइन’ के तहत संतुलन की कोशिश
रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता दिलीप कुमार के अनुसार, इस निर्णय के तहत परीक्षार्थी धार्मिक प्रतीकों के साथ परीक्षा में बैठ सकते हैं, बशर्ते उन चिन्हों की उचित जांच परीक्षा से पहले की जाए। इस नई व्यवस्था को ‘सेक्युलर गाइडलाइन’ नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य आस्था और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है।
हालिया विवादों के बाद लिया गया निर्णय
इस फैसले की पृष्ठभूमि में हाल ही में कर्नाटक और पंजाब में हुए विवाद हैं, जहां रेलवे भर्ती परीक्षा के दौरान कुछ छात्रों से कलावा और अन्य धार्मिक प्रतीक उतरवा लिए गए थे, जिससे छात्रों में नाराजगी और विरोध देखने को मिला। इन घटनाओं के बाद रेलवे प्रशासन ने नियमों की समीक्षा कर यह संशोधन किया है।
उम्मीदवारों की पहचान ऐसे होगी सुनिश्चित
नई व्यवस्था के तहत परीक्षार्थियों की पहचान की प्रक्रिया को भी और अधिक तकनीकी और सुरक्षित बनाया गया है। अब परीक्षा केंद्रों पर AI-आधारित रियल टाइम फेस मैचिंग सिस्टम के जरिए पहचान सत्यापित की जाएगी। KYC दस्तावेजों के माध्यम से चेहरे का वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होगा। साथ ही, सभी परीक्षा केंद्रों पर 100% CCTV निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
रेलवे का यह कदम धार्मिक स्वतंत्रता और आधुनिक तकनीक के संतुलन का उदाहरण है। इससे जहां एक ओर छात्रों की आस्था का सम्मान होगा, वहीं परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा भी पहले से बेहतर होगी। यदि आप आगामी रेलवे परीक्षा में शामिल होने वाले हैं, तो यह बदलाव आपके लिए निश्चित रूप से राहत और सकारात्मक संकेत लेकर आया है।




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