
भारत में मेडिकल शिक्षा की सर्वोच्च संस्था नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) अब विदेशी यूनिवर्सिटीज के मेडिकल कोर्सेज को मान्यता देने के लिए फीस वसूलने की तैयारी में है। इसके लिए NMC ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसका नाम है — “नेशनल मेडिकल कमीशन (चिकित्सा योग्यता की मान्यता) विनियम (संशोधन) 2025″। इस संशोधन में नियमों को सख्त करते हुए कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
क्या है नया नियम?
अब अगर कोई विदेशी यूनिवर्सिटी या कोई अंतरराष्ट्रीय मान्यता एजेंसी अपने मेडिकल कोर्स को भारत में मान्य करवाना चाहती है, तो उसे NMC को प्रति कोर्स $10,000 (लगभग ₹8.6 लाख) की फीस देनी होगी। यह फीस आवेदन करते समय ही जमा करनी होगी।
सरल शब्दों में, अगर कोई विदेशी संस्थान MBBS करवा रहा है और चाहता है कि भारत में उसके छात्रों को मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति मिले, तो पहले उसे NMC से मान्यता लेनी होगी — और अब इसके लिए मोटी फीस देनी पड़ेगी।
NMC ने क्या बदला है?
NMC ने “चिकित्सा योग्यता की मान्यता” वाले नियमों के सेक्शन 7 में संशोधन करते हुए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। पुराने नियमों को हटाकर नया क्लॉज जोड़ा गया है, जिसमें विदेशी प्राधिकरण को आवेदन के समय प्रति योग्यता $10,000 का भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस फैसले का महत्व क्यों है?
हर साल भारत से 25,000 से अधिक छात्र MBBS की पढ़ाई के लिए रूस, चीन, जॉर्जिया, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों में जाते हैं। इन छात्रों को भारत में मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति तभी मिलती है जब उनकी डिग्री को NMC की मान्यता प्राप्त हो। यह नियम ऐसे समय लाया गया है जब विदेश में मेडिकल पढ़ाई के मामले में भारत शीर्ष देशों में शामिल हो रहा है।
क्या ऐसा अन्य देशों में भी होता है?
हां, अमेरिका, कनाडा, और ब्रिटेन जैसे कई विकसित देश भी विदेशी मेडिकल कोर्सेज को मान्यता देने के बदले फीस वसूलते हैं। अब भारत भी इसी श्रेणी में शामिल हो रहा है, जिससे गुणवत्ता पर नियंत्रण और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की जा सकेगी।
NMC का यह कदम मेडिकल शिक्षा के स्तर को सुधारने और विदेशी यूनिवर्सिटीज पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में एक अहम प्रयास है। इससे भारतीय छात्रों को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि वे जिन यूनिवर्सिटीज में दाखिला ले रहे हैं, उनकी डिग्री भारत में मान्य होगी या नहीं।




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