
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने स्कूल पाठ्यक्रम में तीन महान सैनिकों – फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान, और मेजर सोमनाथ शर्मा – के जीवन पर आधारित अध्याय शामिल किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों को कर्तव्य, साहस और देशभक्ति जैसे मूल्यों से परिचित कराना और उन्हें देशसेवा के लिए प्रेरित करना है।
छात्रों को मिलेगा वीरता और बलिदान से परिचय
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन अध्यायों के माध्यम से छात्र न केवल देश के सैन्य इतिहास से जुड़ी घटनाओं को जानेंगे, बल्कि वे सहनशीलता, सहानुभूति, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और राष्ट्र निर्माण में योगदान जैसे मानवीय मूल्यों को भी समझ पाएंगे।
इन कक्षाओं में जोड़े गए नए अध्याय
कक्षा 8 (अंग्रेजी माध्यम): मेजर सोमनाथ शर्मा
कक्षा 8 (उर्दू माध्यम): फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ
कक्षा 7 (उर्दू माध्यम): ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान
तीनों वीर योद्धाओं की संक्षिप्त झलक
मेजर सोमनाथ शर्मा: भारतीय सेना के पहले परमवीर चक्र विजेता। 1947 में बडगाम की लड़ाई के दौरान उन्होंने वीरता का अद्वितीय परिचय देते हुए अपने प्राण देश के लिए न्यौछावर किए।
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान: 1948 में जम्मू-कश्मीर में लड़ते हुए शहीद, मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित। उन्हें ‘नौशेरा का शेर’ भी कहा जाता है।
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ: भारतीय सेना के पहले अधिकारी जिन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि मिली। उनके नेतृत्व में भारत ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक को भी मिला स्थान
पाठ्यक्रम में अब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) से संबंधित जानकारी भी शामिल की गई है। यह स्मारक दिल्ली के सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में स्थित है और 25 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था।
इसका उद्देश्य है:
देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि देना
छात्रों में देशभक्ति, उच्च नैतिक मूल्यों और बलिदान की भावना विकसित करना
राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी को बढ़ावा देना
इन पाठ्यक्रम परिवर्तनों के माध्यम से एनसीईआरटी और रक्षा मंत्रालय का प्रयास है कि नई पीढ़ी भारतीय सेना के वीरों के साहसिक कार्यों से प्रेरणा ले और उनमें राष्ट्र के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।




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