
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा बोर्ड (WBJEEB) को निर्देश दिया है कि वह WBJEE 2025 के लिए नई मेरिट लिस्ट जारी करे। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मेरिट लिस्ट ओबीसी आरक्षण से संबंधित पूर्व आदेशों के अनुरूप नहीं है और इसे नियमों का उल्लंघन माना गया है।
इन वर्गों को मिलेगा 7% आरक्षण
न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि 2010 से पहले राज्य के पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त 66 ओबीसी वर्गों को 7 प्रतिशत आरक्षण देना अनिवार्य है। कोर्ट ने WBJEEB को यह कार्य आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।
साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि तीन सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई के दौरान WBJEE बोर्ड के रजिस्ट्रार, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ विशेष सचिव स्तर के अधिकारी को अनुपालन हलफनामा (compliance affidavit) दाखिल करना होगा।
कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
न्यायमूर्ति चंदा ने कहा कि 21 मई 2025 को हाईकोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक आदेश जारी किया था, लेकिन WBJEEB ने उस आदेश का पालन न करते हुए मेरिट लिस्ट तैयार की। उन्होंने बताया कि यह मामला स्वतः संज्ञान (suo moto) में तब आया जब उन्हें कई परीक्षार्थियों ने ईमेल के ज़रिए शिकायतें भेजीं।
कोर्ट ने कहा कि WBJEEB ने 2025 की मेरिट लिस्ट नई आरक्षण नीति के अनुसार तैयार करने की योजना बनाई थी, जो 10 जून 2025 से प्रभावी हुई। जबकि 17 जून 2025 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस नई नीति पर स्थगन आदेश (stay) दे दिया था। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को एक अंतरिम आदेश देकर इस नीति को 11 अगस्त तक अस्थायी रूप से लागू करने की अनुमति दी थी।
“पुरानी परीक्षा पर नई नीति कैसे?” – कोर्ट का सवाल
न्यायमूर्ति चंदा ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “WBJEE 2025 की सूचना पुस्तिका 24 दिसंबर 2024 को जारी की गई थी, आवेदन की अंतिम तिथि 23 फरवरी 2025 थी और परीक्षा 27 अप्रैल 2025 को हुई। ऐसे में यह समझ से परे है कि 10 जून 2025 से लागू हुई नई आरक्षण नीति इस परीक्षा पर कैसे लागू हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर मान भी लिया जाए कि यह नई नीति भविष्य में वैध हो जाती है, तब भी इसे केवल आगामी परीक्षाओं पर ही लागू किया जा सकता है। इसे 2025 की परीक्षा की मेरिट लिस्ट पर लागू करना न केवल अनुचित, बल्कि अस्वीकार्य है।”
इस फैसले के बाद अब WBJEEB को 2025 की मेरिट लिस्ट को संशोधित करना होगा और कोर्ट के निर्देशानुसार आरक्षण नीति को सही ढंग से लागू करना होगा।




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