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मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई में राज्य शिक्षा नीति (SEP) का किया विमोचन, तमिलनाडु की शिक्षा में बदलाव की शुरुआत

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने आज चेन्नई स्थित अन्ना शताब्दी पुस्तकालय सभागार में राज्य शिक्षा नीति (State Education Policy – SEP) का औपचारिक रूप से विमोचन किया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना और सभी छात्रों के लिए समान, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।

नीति की विशेषताएं
राज्य शिक्षा नीति को उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डी. मुरुगेसन की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने तैयार किया है, जिसे बीते वर्ष सरकार को सौंपा गया था। इस नीति में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और अंग्रेज़ी भाषा में दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

नीति का मूल उद्देश्य सभी छात्रों के लिए समान अवसर प्रदान करना है, जिससे शिक्षा अधिक व्यापक और सुलभ बन सके।

“रटने की जगह सोचने पर ज़ोर”: स्टालिन
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा, “हम चाहते हैं कि छात्र केवल रटें नहीं, बल्कि सोचें और वास्तव में शिक्षित बनें। शारीरिक शिक्षा को भी पढ़ाई का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम राज्य में दो-भाषा नीति का सख्ती से पालन करते रहेंगे, और यह हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि SEP के तहत राज्य भर में स्मार्ट क्लासरूम की शुरुआत की जाएगी और तर्कसंगत विचारधारा को शिक्षा का आधार बनाया जाएगा।

शिक्षा में समानता और समावेशन पर ज़ोर
मुख्यमंत्री ने कहा, “हम किसी को भी शिक्षा से वंचित नहीं रहने देंगे। हमारी राज्य शिक्षा नीति का उद्देश्य ‘समधुवा कल्वी’ (समान शिक्षा) और ‘पगुधारिवु कल्वी’ (तर्कसंगत शिक्षा) को बढ़ावा देना है। यह नीति शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाकर छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगी।”

उन्होंने बताया कि वर्तमान में 75% स्कूली छात्र उच्च शिक्षा में प्रवेश ले रहे हैं, और सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 100% तक पहुंचाना है।

प्रमुख संस्थानों में दाखिले को बढ़ावा
स्टालिन ने यह भी बताया कि इस वर्ष राज्य के 901 छात्र देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला पाने में सफल हुए हैं। उन्होंने छात्रों से कहा, “कॉलेज में प्रवेश आपका करियर तय करने का पहला कदम है। यह अनुभव आपके भविष्य की दिशा तय करेगा।”

NEP के विरोध के बीच SEP की घोषणा
यह नीति ऐसे समय में सामने आई है जब तमिलनाडु की डीएमके सरकार केंद्र द्वारा लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का खुलकर विरोध कर रही है। राज्य सरकार का कहना है कि NEP सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और इसके जरिए हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है। तमिलनाडु सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वह NEP को राज्य में लागू नहीं करेगी।

Asmita Sarkar

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