
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने राज्य की नई शिक्षा नीति (Tamil Nadu State Education Policy 2025) की घोषणा की है। यह नीति केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के जवाब में पेश की गई है, जिसे स्टालिन ने सामाजिक न्याय के खिलाफ और राज्य पर हिंदी थोपने का प्रयास करार दिया।
द्विभाषी नीति पर कायम रहेगा तमिलनाडु
मुख्यमंत्री स्टालिन ने दो टूक कहा कि तमिलनाडु अपनी द्विभाषी नीति—तमिल और अंग्रेज़ी—पर अडिग रहेगा। उन्होंने नई नीति को प्रगतिशील विचारों पर आधारित बताया, जिसका उद्देश्य छात्रों को सिर्फ रटने की बजाय सोचने, प्रश्न पूछने और तकनीकी रूप से सक्षम बनने के लिए प्रेरित करना है।
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा, “हम अपने छात्रों को ऊर्जा और रचनात्मकता से भरना चाहते हैं, ताकि वे भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।”
उन्होंने यह भी दोहराया कि तमिल भाषा राज्य की पहचान और गर्व है, और अंग्रेज़ी के साथ उसका प्रयोग द्विभाषी मॉडल के रूप में जारी रहेगा।
शारीरिक गतिविधियों और व्यावहारिक शिक्षा पर ज़ोर
नई शिक्षा नीति में शारीरिक गतिविधियों, क्रिटिकल थिंकिंग और स्किल डेवलपमेंट को विशेष महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को संपूर्ण विकास की दिशा में प्रेरित करना है।
कक्षा 11 में नहीं होगी कोई सार्वजनिक परीक्षा
राज्य की नई शिक्षा नीति के तहत यह निर्णय भी लिया गया है कि अब कक्षा 11 के लिए कोई सार्वजनिक परीक्षा नहीं ली जाएगी। यह कदम छात्रों पर अनावश्यक परीक्षा के बोझ को कम करने की दिशा में माना जा रहा है।
सरकारी स्कूल छात्रों को सम्मानित किया गया
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों से उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को प्रशंसा प्रमाणपत्र और लैपटॉप भेंट किए। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए “गर्व और संतोष” का क्षण है कि वे राज्य की यह ऐतिहासिक नीति जारी कर रहे हैं।
14-सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर बनी नीति
तमिलनाडु देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने अपनी अलग शिक्षा नीति लागू की है। यह नीति दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. मुरुगेशन की अध्यक्षता वाली 14-सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर आधारित है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, स्कूल शिक्षा मंत्री अन्बिल महेश पोय्यामोझी, मुख्य सचिव एन. मुरुगनंदम, अन्य मंत्रीगण और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।




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