
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में प्रतिभा सेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि UPSC जैसी कठिन परीक्षाओं में कई होनहार छात्र कठिन परिस्थितियों से जूझकर तैयारी करते हैं, लेकिन मामूली अंतर के कारण अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाते। ऐसे युवाओं की मेहनत व्यर्थ न जाए, इसके लिए यह पहल शुरू की गई है।
छूटे हुए टैलेंट का डेटाबैंक
‘प्रतिभा सेतु’ पर उन उम्मीदवारों का डेटा मौजूद है जिन्होंने UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के सभी चरण पास किए लेकिन अंतिम चयन सूची में शामिल नहीं हो सके। वर्तमान में 10,000 से अधिक युवाओं का डेटाबेस पोर्टल पर उपलब्ध है। इनमें से कोई सिविल सर्विसेज, कोई इंजीनियरिंग सर्विसेज और कोई मेडिकल सर्विसेज तक पहुँच चुका था, पर अंतिम चयन से चूक गया।
रोजगार से जोड़ने की पहल
प्रधानमंत्री ने बताया कि निजी कंपनियां अब इस पोर्टल से प्रतिभाशाली युवाओं की जानकारी लेकर उन्हें नियुक्त कर रही हैं। इस प्रयास से सैकड़ों उम्मीदवारों को रोजगार मिला है और वे नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
योजना का उद्देश्य और बदलाव
‘प्रतिभा सेतु’ योजना का मकसद UPSC की आठ प्रमुख परीक्षाओं में मामूली अंतर से असफल रहने वाले उम्मीदवारों को नए रोजगार अवसर दिलाना है। पहले इसे पब्लिक डिस्क्लोजर स्कीम (2018) के नाम से जाना जाता था। अब इसका नाम बदलकर प्रतिभा सेतु कर दिया गया है।
पहले केवल सूची प्रकाशित होती थी, नियोक्ताओं से संपर्क का कोई सीधा साधन नहीं था। अब कंपनियों को लॉगइन आईडी, डैशबोर्ड, शॉर्टलिस्टिंग, चयन और रिजेक्शन जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। साथ ही, डेटा साझा करने से पहले उम्मीदवार की सहमति ली जाती है।




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