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त्रिपुरा में अंतरिक्ष शिक्षा पुस्तकालय की शुरुआत, छात्रों को मिलेगा चंद्रयान से मंगल मिशन तक का ज्ञान

नई पीढ़ी के बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि जगाने के लिए त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के ईस्ट रैटविसा डार्लोंग पारा हाई स्कूल में एक अनोखा अंतरिक्ष शिक्षा पुस्तकालय स्थापित किया गया है।

इस लाइब्रेरी में एसएलवी मार्क-II, पीएसएलवी और जीएसएलवी जैसे रॉकेटों के छोटे मॉडल रखे गए हैं। साथ ही, चंद्रयान, मंगल मिशन और सौर मिशन जैसे अभियानों के मॉडल भी प्रदर्शित हैं। बच्चों को विषय की गहरी समझ दिलाने के लिए अंतरिक्ष विज्ञान पर रिकॉर्डेड लेक्चर भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

आदिवासी छात्रों के लिए नई पहल
कुमारघाट के खंड विकास अधिकारी (BDO) सुदीप भौमिक ने कहा, “हमारा उद्देश्य दूरदराज के आदिवासी इलाकों के छात्रों को भारत की प्रगति से जोड़ना है – साइकिल पर रॉकेट ले जाने से लेकर आज के मानव मिशनों तक। अंतरिक्ष शिक्षा में उनकी रुचि बढ़ाना और उन्हें प्रेरित करना ही हमारी प्राथमिकता है।”

उन्होंने बताया कि पुस्तकालय में खगोलशास्त्र, अंतरिक्ष विज्ञान और भारतीय वैज्ञानिकों पर 100 से अधिक किताबें और बच्चों की पत्रिकाएं उपलब्ध हैं। यह सुविधा न सिर्फ स्थानीय, बल्कि आसपास के अन्य स्कूलों के बच्चों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

स्मार्ट क्लासरूम और सौर ऊर्जा का उपयोग
यह पुस्तकालय ‘नानाजी देशमुख सर्वोत्कृष्ट पंचायत सतत विकास पुरस्कार’ के तहत प्राप्त अनुदान से बनाया गया है। इसके साथ ही, स्कूल में एक आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम भी तैयार किया गया है, जिसमें डिजिटल पैनल, डिजिटल पोडियम और प्रशिक्षण कुर्सियां उपलब्ध हैं।

स्कूल पूरी तरह 5 किलोवाट सौर ऊर्जा प्रणाली पर संचालित होता है। पारंपरिक बिजली का उपयोग नहीं किया जाता, और सौर पैनल से ऑडियो सिस्टम, लाइट्स और पंखों तक सभी आवश्यकताएँ पूरी की जाती हैं।

शिक्षा और अवसर का नया द्वार
कुमारघाट ब्लॉक सलाहकार समिति (BAC) का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना नहीं, बल्कि छात्रों को एक उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाना भी है।

स्कूल के शिक्षक रिंगामपर हलाम ने बताया कि समग्र विकास के कारण छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024-25 में जहाँ छात्रों की संख्या 67 थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 201 हो गई। इनमें से 57 छात्र पहले निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ते थे, लेकिन अब इस विद्यालय को चुन रहे हैं।

गुणवत्ता और सफलता का रिकॉर्ड
पूर्व रैटविसा गांव समिति, जो 800 से अधिक आदिवासी परिवारों का घर है, इस विद्यालय का प्रबंधन करती है। यहाँ त्रिपुरी, गारो, रियांग, हलाम और डार्लोंग जैसे समुदाय रहते हैं।

गांव समिति के प्रभारी मृणाल मजूमदार ने बताया कि पिछले साल कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में स्कूल ने 100% सफलता दर्ज की। यही कारण है कि अब कई परिवार अपने बच्चों को निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की जगह इस सरकारी विद्यालय में दाखिला दिला रहे हैं।

Asmita Sarkar

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