
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के सामाजिक विज्ञान संकाय के राजनीतिक अध्ययन केंद्र में कार्यरत संकाय सदस्य डॉ. रोहन वीएच चौधरी की सेवा समाप्ति को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) ने अपनी सामान्य निकाय बैठक (GBM) में विश्वविद्यालय के कुलगुरु को पद से हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखने का प्रस्ताव पारित किया।
बैठक में एक सितंबर को प्रशासनिक ब्लॉक पर विरोध प्रदर्शन करने सहित कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जेएनयू शिक्षक संघ अध्यक्ष सुरजीत मजमूदार ने कहा कि “डॉ. चौधरी की बर्खास्तगी विश्वविद्यालय के अधिनियम, विधियों और अध्यादेशों का उल्लंघन है तथा यह पूरी तरह मनमानी और प्रतिशोध से प्रेरित निर्णय है।”
बहुमत का अभाव
JNUTA का आरोप है कि यह निर्णय कार्यकारी परिषद (EC) का नहीं, बल्कि कुलगुरु का व्यक्तिगत फैसला था। नियमों के अनुसार किसी शिक्षक की सेवा समाप्त करने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।
26 अगस्त को हुई 323वीं ईसी बैठक में कुल 13 सदस्य उपस्थित थे। आवश्यक बहुमत के लिए नौ वोट चाहिए थे, जबकि तीन निर्वाचित सदस्यों ने लिखित रूप से अपनी असहमति दर्ज की। इससे स्पष्ट है कि बहुमत का समर्थन इस निर्णय के पक्ष में नहीं था।




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