
दूरदर्शी शिक्षाविद और चिन्मया स्कूलों की संस्थापक-प्राचार्या कमाक्षी बालकृष्णन का बुधवार को 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें ‘आयरन लेडी’ ऑफ एजुकेशन के नाम से भी जाना जाता था।
दक्षिण भारत में सीबीएसई शिक्षा की नींव रखने वालों में वाई.जी. पार्थसारथी और अलमेलु के साथ उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने 1970 के दशक में अपनी बहनों के सहयोग से कोच्चि और केरल में सीबीएसई शिक्षा पद्धति की शुरुआत कराई।
एर्नाकुलम स्थित चिन्मया विद्यापीठ और चिन्मया कॉलेज की संस्थापक निदेशक रहीं कमाक्षी ने शिक्षा में कठोर अनुशासन के साथ-साथ कला और संस्कृति को भी बढ़ावा दिया। उन्होंने चिन्मया एजुकेशन ट्रस्ट की ट्रस्टी और कई स्कूल बोर्डों की निदेशक के रूप में भी सेवाएँ दीं।
महाराजा कॉलेज, कोच्चि और मद्रास विश्वविद्यालय से पढ़ाई के बाद उन्होंने बेंगलुरु विश्वविद्यालय से बी.एड. में द्वितीय स्थान हासिल किया। दिल्ली के लोरेटो कॉन्वेंट में अध्यापन के बाद 1976 में स्वामी चिन्मयानंद के आमंत्रण पर उन्होंने चिन्मया विद्यालय की जिम्मेदारी संभाली और इसे राज्य का अग्रणी शिक्षण संस्थान बनाया।
छात्रों के बीच ‘कमाक्षी मैम’ के नाम से प्रसिद्ध वह शिक्षा क्षेत्र की ‘आयरन लेडी’ कही जाती थीं। जीवन के अंतिम वर्षों में भी उन्होंने तत्त्वा सेंटर ऑफ लर्निंग में संरक्षिका के रूप में कला और शिक्षा से जुड़ाव बनाए रखा।
उनका पार्थिव शरीर उनके निवास पार्वती निवास (दीवान्स रोड, दुर्बार हॉल ग्राउंड के पास) पर श्रद्धांजलि के लिए रखा गया है। वह अपनी बेटियों माया मोहन और रेम जयराम, भाई एम.के. दास और परिवारजनों को छोड़ गई हैं।




Add comment