
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के. टी. परनाइक ने शिक्षा व्यवस्था में त्वरित सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों की क्षमता, तर्कशक्ति और रचनात्मक सोच को विकसित करे।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में 40 शिक्षकों को राज्य पुरस्कार प्रदान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा विद्यार्थियों को जीवन की जटिलताओं से निपटने, अनुशासन बनाए रखने और स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए तैयार करे।
“परीक्षाएं तर्कशक्ति और रचनात्मकता की परख का माध्यम बनें”
राज्यपाल परनाइक ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा केवल परीक्षा की तैयारी, बोर्ड पाठ्यक्रम और उत्तर रटने तक सीमित रहेगी, तो इससे विद्यार्थियों में परफॉर्मेंस एंग्जायटी बढ़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों की तर्कशक्ति और रचनात्मकता को परखना होना चाहिए, न कि एक दिन के दबावपूर्ण टेस्ट से उनकी क्षमता आंकना।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान के प्रयोग, आलोचनात्मक चिंतन, आत्ममंथन और टीमवर्क के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, “यदि कक्षाओं में पुराने ढर्रे को ही अपनाया गया, तो कोई भी राष्ट्र नवाचार और प्रगति नहीं कर पाएगा।”
पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को बधाई देते हुए उन्होंने उन्हें “सच्चा राष्ट्रनिर्माता” बताया, जो नई पीढ़ी के मस्तिष्क और समाज की दिशा तय करते हैं।
शिक्षकों को खुद को अपडेट रखने की सलाह
राज्यपाल ने शिक्षकों से अपील की कि वे पुस्तकों से परे जाकर लगातार स्वयं को अपडेट रखें, नई शिक्षण पद्धतियां अपनाएं और अपने आचरण से विद्यार्थियों के लिए मूल्यों की स्थापना करें। उन्होंने विशेष रूप से कमजोर छात्रों पर ध्यान देने, महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेने और विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सहयोग तथा अनुशासन की भावना विकसित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लासरूम, स्थानीय सामग्री और कौशल-आधारित शिक्षा को समय की मांग बताया। साथ ही कहा कि अकादमिक पढ़ाई के साथ छात्रों को जलविद्युत, कृषि, पर्यटन, आईटी और पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों से भी जोड़ना चाहिए।
अंत में राज्यपाल ने कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 हमें लचीली, बहुविषयक और कौशल-आधारित शिक्षा का ढांचा प्रदान करती है। यदि इसे ईमानदारी से लागू किया जाए, तो हम शैक्षिक असमानता को कम कर अपने विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार कर सकते हैं।”




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