
तेलंगाना सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से ‘युवा भारत एकीकृत आवासीय विद्यालयों (YIIRS)’ के निर्माण और शिक्षा क्षेत्र में निवेश हेतु 30,000 करोड़ रुपये की विशेष धनराशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। सरकार ने मांग की है कि यह राशि राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM) की सीमा से बाहर रखी जाए।
उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने दिल्ली में वित्त मंत्री से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया गया कि शिक्षा क्षेत्र के व्यापक बदलाव के लिए अनुमानित 30,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, जिसमें से 21,000 करोड़ रुपये से 105 वाईआईआईआरएस परिसरों का निर्माण और शेष 9,000 करोड़ रुपये संबद्ध निवेश पर खर्च किए जाएंगे।
सिस्टम-व्यापी सुधार और आधुनिक शिक्षा मॉडल
ज्ञापन में कहा गया कि राज्य सरकार निर्माण और संबद्ध निवेश के लिए एक विशेष प्रयोजन निगम (SPV) के माध्यम से ऋण जुटाने का प्रस्ताव रखती है। इसके लिए आग्रह किया गया है कि इन उधारों को एफआरबीएम सीमा से छूट दी जाए, क्योंकि यह सामान्य व्यय नहीं बल्कि मानव विकास में दीर्घकालिक पूंजी निवेश है।
वाईआईआईआरएस मॉडल सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरे स्कूल सिस्टम को बदलने का प्रयास है। इसमें छात्रों को बहु-विषयक शिक्षा, एआई-सक्षम कक्षाएं, एसटीईएम और व्यावसायिक प्रयोगशालाएं, पोषण सेवाएं, खेल और कला का समावेश, सुरक्षित एवं लैंगिक-संवेदनशील रहने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
तेलंगाना के बच्चों के लिए आधुनिक और सुरक्षित विद्यालय
प्रत्येक परिसर में कर्मचारियों के लिए आवास, स्वास्थ्य इकाइयां, परामर्श सेवाएं और स्थायित्व सुविधाएं जैसे— छत पर सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण, अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली भी विकसित की जाएंगी।
विक्रमार्क ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य तेलंगाना के सबसे गरीब बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा और सुरक्षित माहौल प्रदान करना है। यह योजना एसडीजी-4 (समान और समावेशी शिक्षा) के अनुरूप है और भारत की शिक्षा संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
साथ ही, यह पहल मानव पूंजी निर्माण को प्राथमिकता देती है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर प्रगति को तेज करने में मदद करेगी।




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