
एपीजी विश्वविद्यालय ने शिमला वन प्रभाग (ग्रामीण) के सहयोग से बीते 6 अक्टूबर 2025 को अपने परिसर में विशेष आयोजन के रूप में 75वां राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह मनाया। यह पहल युवाओं में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति सोच में बदलाव लाने का एक सराहनीय प्रयास है।
कार्यक्रम में छात्रों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया जिनका उद्देश्य सीखना और प्रेरित करना था। इनमें सबसे प्रमुख रहा भाषण प्रतियोगिता — “सिंगल यूज़ प्लास्टिक: पर्यावरण के लिए खतरा” विषय पर। इस प्रतियोगिता के माध्यम से छात्रों को प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ सक्रिय कार्यकर्ता बनने और प्रकृति की रक्षा के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
भारत में हर साल 2 से 8 अक्टूबर के बीच वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है ताकि देश की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाई जा सके। इस वर्ष के 75वें संस्करण में भी युवाओं की भागीदारी पर विशेष बल दिया गया, यह दर्शाते हुए कि शिक्षा ही स्वच्छ और हरित भविष्य की कुंजी है।
एपीजी विश्वविद्यालय का यह कार्यक्रम राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है — समुदायों को वन्यजीव और पर्यावरण के संरक्षक के रूप में सशक्त बनाना। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि इस तरह के प्रयास छात्रों में रचनात्मकता, जिम्मेदारी और आजीवन पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण की भावना को प्रोत्साहित करेंगे।
विश्वविद्यालय का संदेश था — “आपकी आवाज़ मायने रखती है, आपके कार्य मायने रखते हैं। परिवर्तन का हिस्सा बनिए!” — जिसने छात्रों और समुदाय दोनों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया।
एपीजी विश्वविद्यालय और शिमला वन प्रभाग की यह साझेदारी इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि किस तरह शैक्षणिक संस्थान नई पीढ़ी को प्रकृति और वन्यजीवों की देखभाल के लिए प्रेरित कर सकते हैं।




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