
ग्लोबल रिसर्च पब्लिशर स्प्रिंगर नेचर ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के साथ मिलकर ‘इंडिया रिसर्च टूर’ का तीसरा एडिशन लॉन्च किया है। यह पहल देशभर के 15 शहरों और 7 राज्यों के 29 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचेगी। इसका मुख्य उद्देश्य है — रिसर्च में ईमानदारी को बढ़ावा देना, नए विचारों को प्रोत्साहित करना और खासतौर पर महिलाओं को रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ाना।
लॉन्च इवेंट में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा, “यह टूर महिलाओं को शोध में आगे लाने और विद्यार्थियों को सही दिशा देने का शानदार अवसर है। यह ‘विकसित भारत’ के विज़न में अहम योगदान देगा।”
स्प्रिंगर नेचर के CEO फ्रैंक व्रांकेन पीटर्स ने कहा, “यह पहल भारत के रिसर्च इकोसिस्टम के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस और लोकल टैलेंट को जोड़ने का माध्यम बनेगी।”
महिलाओं को केंद्र में रखकर रिसर्च का विस्तार
ICSSR के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों में यह टूर 25 शहरों और 15 राज्यों के 36 संस्थानों तक पहुंचा और 200 से अधिक महिला शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
उन्होंने बताया, “हम आधे से ज्यादा रिसर्च ग्रांट महिलाओं को देते हैं। हाल ही में शुरू किए गए ‘वूमेन इन रिसर्च फॉर वूमेन डेवलपमेंट’ कार्यक्रम के तहत 158 महिला शोधकर्ताओं को सपोर्ट दिया गया।”
स्प्रिंगर नेचर इंडिया के MD वेंकटेश सर्वसिद्धि ने कहा कि “महिलाओं को रिसर्च में सुरक्षा, फंडिंग और समय पर स्टाइपेंड जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हम 1100+ महिला प्रोजेक्ट डायरेक्टर्स और 100+ रिसर्च फेलोज़ को सपोर्ट कर रहे हैं। हमारे प्रोग्राम ‘Her Research, Our Future’ के जरिए उन्हें अवॉर्ड और रिकॉग्निशन दिया जाता है।”
IIT से लेकर ICAR तक — रिसर्च का व्यापक नेटवर्क
यह टूर केवल IIT या IIM तक सीमित नहीं है। इसमें IIT खड़गपुर, IIT कानपुर, IIT गुवाहाटी, मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज, IIM कलकत्ता, IIM लखनऊ, IIM बोधगया, ICAR, इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट समेत कई सेंट्रल और स्टेट यूनिवर्सिटीज शामिल हैं।
सर्वसिद्धि ने बताया, “हम टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, मेडिकल और सोशल साइंस जैसे सभी क्षेत्रों को कवर कर रहे हैं। ICSSR के साथ मिलकर हम रिसर्च को आसान भाषा में समाज तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि यह पेटेंट से पॉलिसी मेकिंग तक उपयोगी हो सके।”
एआई से प्लेजरिज्म और भाषा की बाधाएं खत्म करने की दिशा में कदम
इस टूर में AI की भूमिका भी अहम रहेगी। सर्वसिद्धि ने बताया, “हम SnappShot और जिप्टो जैसे AI टूल्स से इमेज कॉपी और प्लेजरिज्म की पहचान करते हैं। ये टूल्स फ्री उपलब्ध हैं।”
उन्होंने कहा, “भारत में 40 से अधिक प्रमुख भाषाएं हैं, इसलिए हम OpenAI, Perplexity और Nature Research Assistant की मदद से रिसर्च को विभिन्न भाषाओं में ट्रांसलेट करने पर काम कर रहे हैं। हालांकि, टेक्निकल शब्दों का अनुवाद अब भी चुनौती बना हुआ है।”
ओपन एक्सेस और SDG पर विशेष ध्यान
‘इंडिया रिसर्च टूर’ में ओपन एक्सेस, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ONOS), रिसर्च इंटेग्रिटी और UN सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) पर भी फोकस रहेगा। सर्वसिद्धि ने कहा, “हम फ्री सेशंस में रिसर्च मेथडोलॉजी सिखाते हैं, जो आमतौर पर स्कूलों या कॉलेजों में नहीं पढ़ाई जाती। साथ ही ICSSR अब B.Sc., B.Com. और B.Tech स्टूडेंट्स के लिए भी रिसर्च मेथड्स कोर्स शुरू कर रहा है।”




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