
देशभर में शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती के रूप में एकल-शिक्षक विद्यालयों का मुद्दा सामने आया है। शिक्षा मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में 1,04,125 ऐसे स्कूल हैं, जिनमें 33,76,769 छात्र नामांकित हैं। यानी हर स्कूल में औसतन केवल 34 छात्र एक ही शिक्षक से पढ़ाई करते हैं।
सबसे ज्यादा एकल-शिक्षक स्कूल आंध्र प्रदेश में
आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक 12,912 एकल-शिक्षक विद्यालय हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश (9,508), झारखंड (9,172), महाराष्ट्र (8,152), कर्नाटक (7,349) और लक्षद्वीप (7,217) का स्थान है।
वहीं, दिल्ली में केवल 9 ऐसे स्कूल हैं, जबकि पुडुचेरी, लद्दाख, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली तथा चंडीगढ़ में एक भी एकल-शिक्षक विद्यालय नहीं है।
सबसे ज्यादा छात्र उत्तर प्रदेश में
छात्र नामांकन के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है, जहां 6,24,327 छात्र एकल-शिक्षक विद्यालयों में पढ़ रहे हैं। इसके बाद झारखंड (4,36,480), पश्चिम बंगाल (2,35,494), मध्य प्रदेश (2,29,095), कर्नाटक (2,23,142), आंध्र प्रदेश (1,97,113) और राजस्थान (1,72,071) का स्थान है।
एक साल में छह प्रतिशत की गिरावट
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, ऐसे विद्यालयों की संख्या 2022-23 में 1,18,190 से घटकर 2023-24 में 1,10,971 रह गई, जो लगभग 6 प्रतिशत की कमी दर्शाती है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ‘स्कूल युक्तिकरण’ (school rationalisation) के ज़रिए विद्यालयों के एकीकरण और शिक्षकों की पुनः तैनाती पर काम कर रही है ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
क्या कहते हैं अधिकारी?
अधिकारी ने कहा, “एकल-शिक्षक स्कूलों में शिक्षण प्रक्रिया बाधित होती है। इसलिए शून्य नामांकन वाले स्कूलों से शिक्षकों को एकल-शिक्षक स्कूलों में स्थानांतरित किया जा रहा है ताकि हर विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता हो।”
औसत छात्र संख्या: चंडीगढ़ में सबसे अधिक, लद्दाख में सबसे कम
प्रति स्कूल औसतन छात्रों की संख्या के मामले में चंडीगढ़ (1,222) और दिल्ली (808) शीर्ष पर हैं, जो बेहतर बुनियादी ढांचे के उपयोग को दर्शाता है। वहीं, लद्दाख (59), मिजोरम (70), मेघालय (73) और हिमाचल प्रदेश (82) में यह संख्या सबसे कम है।
अधिकारी के अनुसार, “कम नामांकन वाले स्कूलों का विलय किया जा रहा है ताकि शिक्षण संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और सभी छात्रों को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिल सके।”




Add comment