
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आठ हफ्तों के भीतर यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि वे छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और आत्महत्या के मामलों से निपटने के लिए अदालत द्वारा तय दिशानिर्देशों को लागू करने की स्थिति में हैं या नहीं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि वह आठ हफ्तों के भीतर अनुपालन हलफनामा (compliance affidavit) दाखिल करे, जिसमें इन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण दिया जाएगा।
यह आदेश उस 25 जुलाई 2025 के फैसले से संबंधित है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे दो महीने के भीतर निजी कोचिंग संस्थानों के लिए अनिवार्य पंजीकरण, छात्र सुरक्षा मानक और शिकायत निवारण प्रणाली से संबंधित नियम अधिसूचित करें।
अगली सुनवाई जनवरी 2026 में
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जुलाई के फैसले में केंद्र सरकार को 90 दिनों के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया था।
पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मामले में प्रतिवादी (respondents) के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया और कहा कि वे आठ हफ्तों के भीतर अपने जवाब दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होगी।
छात्रों में बढ़ती आत्महत्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त
छात्रों में बढ़ती आत्महत्याओं की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मानसिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि देश में छात्रों, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग केंद्रों से जुड़ी आत्महत्या रोकथाम के लिए कोई एकीकृत कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है, जिससे “विधायी और नियामक शून्य” बना हुआ है।
इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने 15 दिशानिर्देश जारी किए और कहा कि जब तक कोई सक्षम प्राधिकारी विधेयक या नियामक ढांचा तैयार नहीं करता, ये दिशानिर्देश प्रभावी और बाध्यकारी रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थान एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति अपनाएं और उसे लागू करें। यह नीति ‘उम्मीद’ (Understand, Motivate, Manage, Empathise, Empower, Develop) ड्राफ्ट दिशानिर्देश, ‘मनोदर्पण’ पहल और राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति से प्रेरित हो सकती है।
अदालत ने यह भी कहा कि इस नीति की हर साल समीक्षा की जाए और इसे संस्थान की वेबसाइट तथा नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाए।
सरकार के कदम
पीठ ने नोट किया कि केंद्र सरकार ने छात्रों में आत्महत्या की घटनाओं को रोकने और सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने 2023 में स्कूल स्तर पर ‘उम्मीद’ दिशानिर्देश जारी किए। कोविड-19 महामारी के दौरान छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए ‘मनोदर्पण’ कार्यक्रम शुरू किया गया।
पृष्ठभूमि
25 जुलाई का यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर आया था। उस आदेश में विशाखापट्टनम में 17 वर्षीय नीट अभ्यर्थी की संदिग्ध मृत्यु की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग खारिज कर दी गई थी।




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