
भारत का आईटी सेक्टर अब सिर्फ एआई टूल्स के प्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंटिक एआई के सहारे वह दुनिया में तकनीकी बदलाव की अगुवाई कर रहा है। टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग कंपनी थॉटवर्क्स की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि देश की बड़ी टेक कंपनियां इस उभरती तकनीक को तेजी से अपनाकर नई कार्य संस्कृति तैयार कर रही हैं।
रिपोर्ट में शामिल 86% भारतीय आईटी नेताओं का मानना है कि एआई नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि कर्मचारियों के कौशल और उत्पादकता को बेहतर बनाकर उद्योग को नई दिशा दे रहा है।
भारत आगे, अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया पीछे
थॉटवर्क्स द्वारा सात देशों के 3,500 अधिकारियों पर किए गए इस सर्वे में 500 प्रतिभागी भारत से थे। रिपोर्ट के अनुसार, एजेंटिक एआई को अपनाने की रफ्तार में भारत 48% के साथ दुनिया में शीर्ष पर है।
इसके मुकाबले अमेरिका 28% और ऑस्ट्रेलिया 23% पर हैं। कई पश्चिमी देशों का फोकस अभी भी पारंपरिक दक्षता सुधारने वाली एआई टेक्नोलॉजी तक सीमित है, जबकि भारत सीधे उन्नत और स्वायत्त सिस्टमों की ओर बढ़ रहा है।
एजेंटिक एआई ऐसे डिजिटल सिस्टम होते हैं जो इंसानों की तरह सोचने, तर्क करने और स्वतः निर्णय लेकर काम पूरा करने की क्षमता रखते हैं।
भारतीय कंपनियों का नजरिया बेहद सकारात्मक
सर्वे में शामिल 10 में से 9 भारतीय नेताओं ने कहा कि एआई कर्मचारियों की क्षमता बढ़ा रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर तेज़ काम, बेहतर गुणवत्ता और दक्षता में देखा जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि 57% भारतीय कंपनियों ने स्वीकार किया कि मानव और एआई के सहयोग से उनकी संस्थाओं में नई भूमिकाएं और पद भी बने हैं। यानी एआई ऑटोमेशन नौकरी घटाने के बजाय नए अवसर पैदा कर रहा है।
राजस्व बढ़ने को लेकर भारतीय नेतृत्व सबसे अधिक आत्मविश्वासी
एआई से होने वाले आर्थिक लाभ पर भारतीय आईटी कंपनियां सबसे ज्यादा भरोसा कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 49% भारतीय कंपनियों का अनुमान है कि अगले पांच साल में उनकी आय में 15% से अधिक की बढ़त होगी। 14% भारतीय लीडर्स अगले 12 महीनों में ही इतनी वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जो वैश्विक औसत (8%) से काफी आगे है।
इससे साफ है कि भारतीय उद्योग एआई को सिर्फ तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि विकास की मजबूत रणनीति की तरह देख रहा है।
क्या है एजेंटिक एआई?
एजेंटिक एआई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वह अगला चरण है, जो केवल जवाब देने तक सीमित नहीं रहता। यह खुद निर्णय ले सकता है, योजनाएं बना सकता है और इंसानों की तरह कार्य पूरा कर सकता है।
सरल उदाहरण समझें:
पारंपरिक एआई से पूछा जाए—
“गोवा की सबसे सस्ती फ्लाइट कौन-सी है?”
तो यह सिर्फ विकल्प बता देगा।
जबकि एजेंटिक एआई से कहा जाए—
“अगले हफ्ते 10,000 रुपये के बजट में गोवा की फ्लाइट बुक कर दो।”
तो यह खुद इंटरनेट पर फ्लाइट ढूंढेगा, आपके कैलेंडर से तारीख मिलाएगा और बुकिंग भी पूरी कर देगा। यानी यह एआई सलाह नहीं, बल्कि पूरा काम करके देता है।
तकनीकी भविष्य का नेतृत्व करेगा भारत
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय आईटी कंपनियां अब सिर्फ एआई टूल्स के उपयोग तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे कारोबार को एआई-चालित मॉडल में बदलने की दिशा में बढ़ रही हैं।
एजेंटिक एआई के तेज़ी से अपनाने और कर्मचारियों के कौशल में दिख रहे सुधार के आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक तकनीकी इकोसिस्टम में नई परिभाषा लिख सकता है।
India Becomes a Global Leader in the Era of Agentic AI, Ushering in a New Revolution in the IT Sector




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