
नीट-पीजी 2025-26 की योग्यता कट-ऑफ में की गई कटौती को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) और केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई की तारीख शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 तय की है।
यह जनहित याचिका योग्यता कट-ऑफ प्रतिशत को कम करने के फैसले के खिलाफ दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं में सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, न्यूरोसर्जन डॉ. सौरव कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ. आकाश सोनी शामिल हैं। याचिका में दावा किया गया है कि एक विवादित नोटिस के जरिए नीट-पीजी की कट-ऑफ को असामान्य रूप से बहुत नीचे लाया गया है, यहां तक कि शून्य और नकारात्मक स्तर तक।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में योग्यता मानकों में इस तरह की कटौती न केवल मनमानी है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का भी उल्लंघन करती है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि पीजी स्तर पर योग्यता का यह अवमूल्यन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 में तय वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है, जिसका उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना है।
याचिका के अनुसार, केवल खाली सीटों को भरने के लिए कट-ऑफ कम करना मरीजों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की गरिमा के साथ समझौता है। इसमें कहा गया है कि इस तरह का फैसला योग्यता को चयन का आधार बनाने की पूरी प्रक्रिया को कमजोर करता है और प्रतियोगी परीक्षा को सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता में बदल देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा है। अब सभी की निगाहें 6 फरवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट हो सकता है कि नीट-पीजी जैसी अहम परीक्षा में कट-ऑफ से जुड़े नियमों पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा।




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