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73% नियोक्ताओं की नजर फ्रेशर्स पर, 2026 की पहली छमाही में भर्ती बढ़ने के संकेत

73% नियोक्ताओं की नजर फ्रेशर्स पर, 2026 की पहली छमाही में भर्ती बढ़ने के संकेत

73% नियोक्ताओं की नजर फ्रेशर्स पर, 2026 की पहली छमाही में भर्ती बढ़ने के संकेत

देश में पहली बार नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए यह साल उम्मीदों से भरा साबित हो सकता है। टीमलीज एडटेक की नई करियर रिपोर्ट के अनुसार 73 प्रतिशत नियोक्ता 2026 की पहली छमाही में फ्रेशर्स को नौकरी पर रखने की योजना बना रहे हैं। यह प्रवृत्ति दिखाती है कि कंपनियां अब केवल डिग्री के बजाय वास्तविक प्रोजेक्ट अनुभव और इंटर्नशिप को ज्यादा महत्व दे रही हैं।

चार में से तीन नियोक्ता फ्रेशर्स को दे रहे हैं मौका

रिपोर्ट बताती है कि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच किए गए सर्वे में शामिल 1,051 नियोक्ताओं में से लगभग चार में से तीन ने नए उम्मीदवारों को नियुक्त करने की इच्छा जताई। यह पिछले छमाही की तुलना में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जो नए टैलेंट को लेकर बढ़ते भरोसे का संकेत है।

किस सेक्टर में सबसे ज्यादा मांग?

रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा क्षेत्र में फ्रेशर्स की डिमांड सबसे अधिक 91% पर है। इसके बाद ई-कॉमर्स और टेक्नोलॉजी स्टार्टअप सेक्टर 90% मांग के साथ दूसरे स्थान पर है। विनिर्माण क्षेत्र में भी 85% नियोक्ता फ्रेशर्स को मौका देने को तैयार हैं। रिटेल सेक्टर में डार्क स्टोर असिस्टेंट और इन्वेंटरी मैनेजमेंट असिस्टेंट जैसे पद तेजी से बढ़ रहे हैं। ई-कॉमर्स और टेक स्टार्टअप डिजिटल सेल्स एसोसिएट और जूनियर वेब डेवलपर के लिए भर्ती कर रहे हैं। वहीं विनिर्माण कंपनियों में बैटरी असेंबली टेक्नीशियन, इन्वेंटरी और लॉजिस्टिक्स कोऑर्डिनेटर की मांग बढ़ी है।

फ्रेशर्स के कार्यबल में शामिल होने के तरीके में बड़ा बदलाव

टीमलीज एडटेक के संस्थापक और सीईओ शांतनु रूज के अनुसार, इस समय युवा प्रतिभाओं के कार्यबल में प्रवेश करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। उन्होंने बताया कि 2025 में जहां रिटेल क्षेत्र में भर्ती की इच्छा 41% थी, वहीं 2026 की पहली छमाही में यह बढ़कर 91% पहुंच गई है।

यात्रा, बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी भर्ती की इच्छा में भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। यात्रा क्षेत्र में यह 26% से बढ़कर 77% हो गया है, जबकि बिजली और ऊर्जा सेक्टर में यह 22% से तेजी से बढ़कर 72% पहुंच गया है। रूज का कहना है कि अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन कंपनियां उम्मीदवारों के कौशल के आधार पर ज्यादा चयनात्मक हो गई हैं।

असली अंतर किस बात से पड़ रहा है?

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब डिग्री के बजाय व्यावहारिक कौशल असली फर्क पैदा कर रहे हैं। जिन उम्मीदवारों के पास इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो और हैंड्स-ऑन अनुभव है, वे तेजी से अवसर पाते हैं। जबकि केवल डिग्री धारकों को रोजगार पाने में ज्यादा समय लग रहा है। रूज के अनुसार, समस्या का समाधान सीखने की प्रक्रिया में प्रदर्शन आधारित प्रमाण जोड़ने में है, ताकि उम्मीदवार अपनी क्षमता साबित कर सकें।

बंगलूरू बना फ्रेशर्स हायरिंग का सबसे बड़ा केंद्र

रिपोर्ट बताती है कि बंगलूरू 84% के साथ फ्रेशर्स भर्ती के मामले में देश में सबसे आगे है। यह वृद्धि आईटी (81%), ई-कॉमर्स और टेक स्टार्टअप (90%) तथा इंजीनियरिंग व इन्फ्रास्ट्रक्चर (61%) सेक्टर की मांग से संचालित है। यहां सॉफ्टवेयर टेस्टिंग इंजीनियर, डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव और डिग्री अप्रेंटिसशिप के पदों पर सबसे अधिक भर्ती हो रही है।

मुंबई भी तेजी से बढ़ रहा है

फ्रेशर्स भर्ती में मुंबई 72% के साथ दूसरे स्थान पर है। यहां मांग मुख्य रूप से रिटेल (91%), FMCG (80%) और हेल्थकेयर व फार्मा (52%) सेक्टर से आ रही है। बीआईएम कोऑर्डिनेशन असिस्टेंट, डिजिटल सेल्स एसोसिएट और क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट जैसे पदों पर अच्छी भर्ती हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, बंगलूरू और मुंबई मिलकर देश में फ्रेशर्स की भर्ती के बड़े हिस्से को संभाल रहे हैं। इनके जरिए टेक्नोलॉजी, ऑपरेशंस, हेल्थकेयर और कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक अवसर बन रहे हैं।

रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि 2026 की पहली छमाही फ्रेशर्स के लिए अवसरों से भरी होगी। कंपनियां अब नए कौशल वाले युवाओं पर भरोसा कर रही हैं, जिससे रोजगार बाजार में नई ऊर्जा आ रही है।

Asmita Sarkar

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