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2030 तक 30 हजार भारतीय छात्रों को मौका देगा फ्रांस, राष्ट्रपति मैक्रों ने बताई वजह

2030 तक 30 हजार भारतीय छात्रों को मौका देगा फ्रांस, राष्ट्रपति मैक्रों ने बताई वजह

2030 तक 30 हजार भारतीय छात्रों को मौका देगा फ्रांस, राष्ट्रपति मैक्रों ने बताई वजह

भारत दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका देश आने वाले वर्षों में भारतीय छात्रों के लिए शिक्षा के दरवाज़े और अधिक खोलने जा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि फ्रांस 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों का स्वागत करेगा। हाल के वर्षों में फ्रांस भारतीय छात्रों के बीच तेजी से एक लोकप्रिय उच्च शिक्षा गंतव्य बनकर उभरा है, जिसकी एक बड़ी वजह वहां की सरकार द्वारा उच्च शिक्षा पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी है, जिससे पढ़ाई अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती है।

हालांकि, कई छात्रों के मन में यह सवाल रहता है कि जब फीस कम है, तो क्या शिक्षा की गुणवत्ता भी कम होगी? इस धारणा को राष्ट्रपति मैक्रों ने पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि कम शुल्क का मतलब कमज़ोर शिक्षा नहीं है। उनके शब्दों में, “यह एक अजीब तर्क है। फ्रांस में पढ़ाई की लागत कई देशों से कम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शिक्षा गुणवत्ता में कमी है। हमारे यहां शिक्षा लगभग फ्री होने का मतलब यह नहीं कि मानक गिर जाते हैं।”

फ्रांस में पढ़ाई का वास्तविक खर्च

फ्रांस की सरकार विश्वविद्यालयों पर होने वाले बड़े हिस्से का खर्च खुद वहन करती है, जो लाखों रुपये तक हो सकता है। भारतीय छात्रों के लिए फ्रांस में पढ़ाई का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि वे सरकारी विश्वविद्यालय चुनते हैं या प्राइवेट संस्थान।

सरकारी विश्वविद्यालयों में फीस

गैर-यूरोपीय छात्रों के लिए सरकारी विश्वविद्यालयों की फीस अमेरिकी और ब्रिटिश संस्थानों की तुलना में काफी कम है। सामान्यत:

बैचलर्स: लगभग ₹2.60 लाख सालाना

मास्टर्स: लगभग ₹3.50 लाख सालाना

पीएचडी: करीब ₹35,000 सालाना

यह फीस सब्सिडी के कारण कम होती है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता शोध-आधारित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य रहती है।

प्राइवेट संस्थान: खर्च ज्यादा लेकिन विकल्प बेहतर

अगर छात्र प्राइवेट कॉलेज चुनते हैं, तो खर्च बढ़ जाता है। फ्रांस में बिजनेस और इंजीनियरिंग कॉलेज सबसे महंगे माने जाते हैं। यहां वार्षिक खर्च ₹7 लाख से ₹18 लाख के बीच रह सकता है, जो संस्थान और कोर्स के आधार पर बदलता है।

रहने और खाने के खर्च

फीस के अलावा छात्रों को रहने और रोज़मर्रा के खर्च भी खुद उठाने होते हैं। औसतन:

रहना (Accommodation): प्रति माह ₹36,000 से ₹72,000

खाना (Food): ₹18,000 से ₹27,000 प्रति माह

ट्रांसपोर्ट: ₹2,700 से ₹6,800 प्रति माह

इन खर्चों में शहरों के हिसाब से अंतर आ सकता है। पेरिस में खर्च थोड़ा अधिक होता है, जबकि लियोन, टूलूज़ या ग्रेनोब्ल जैसे शहर तुलनात्मक रूप से सस्ते हैं।

हेल्थ इंश्योरेंस और सरकारी सहायता

फ्रांस में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों को हेल्थकेयर इंश्योरेंस मुफ्त में दिया जाता है, जो एक बड़ी राहत है। इसके अलावा, यदि छात्र Caisse d’Allocations Familiales (CAF) के जरिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें किराए पर मिलने वाली सरकारी सहायता से 20% से 40% तक रिफंड भी मिल सकता है।

साथ ही, फ्रांस सरकार भारतीय छात्रों के लिए कई प्रकार की स्कॉलरशिप उपलब्ध कराती है। कुछ स्कॉलरशिप में ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ होती है, जबकि कुछ में प्रतिमाह स्टाइपेंड भी मिलता है, जिससे छात्रों पर वित्तीय बोझ कम होता है।

क्या फ्रांस भारतीय छात्रों के लिए बेहतर विकल्प है?

फ्रांस न केवल यूरोप के उत्कृष्ट शिक्षा केंद्रों में शामिल है, बल्कि यहां का समृद्ध सांस्कृतिक माहौल, वैश्विक करियर अवसर और किफायती शिक्षा मॉडल भारतीय छात्रों के लिए इसे एक संतुलित और आकर्षक विकल्प बनाते हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों की घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फ्रांस आने वाले वर्षों में भारत के छात्रों को और अधिक अवसर देगा—सस्ती फीस, सरकारी सहायता और उच्च शिक्षा गुणवत्ता के साथ।

एडइनबॉक्स टीम

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