
दुनिया में विश्वास को सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। यह दिखाई नहीं देता, लेकिन समाज और संस्थानों को जोड़कर रखने का काम करता है। इसी भरोसे की मिसाल लंबे समय तक अमेरिका की प्रतिष्ठित Princeton University में देखने को मिली, जहां छात्र दशकों तक बिना इंविजिलेटर के परीक्षा देते रहे। हालांकि अब 133 साल पुरानी इस परंपरा को बदलने की तैयारी की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूनिवर्सिटी की फैकल्टी और प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं, जिसमें कक्षा में होने वाली परीक्षाओं के दौरान इंविजिलेटर की मौजूदगी अनिवार्य करने की बात कही गई है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो 2026 के फॉल सेमेस्टर से नई व्यवस्था लागू हो सकती है। इसका मतलब होगा कि प्रिंसटन की वह ऐतिहासिक व्यवस्था खत्म हो जाएगी, जिसके तहत लंबे समय तक बिना निगरानी के परीक्षाएं आयोजित होती रही हैं।
क्या है प्रिंसटन का ऑनर कोड सिस्टम
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में परीक्षा प्रणाली लंबे समय से “ऑनर कोड” पर आधारित रही है। इस व्यवस्था की शुरुआत 1893 में हुई थी। इसके तहत छात्रों को परीक्षा से पहले यह शपथ लेनी होती है कि वे किसी भी तरह की नकल या अनुचित तरीका नहीं अपनाएंगे। अगर कोई छात्र ऐसा करता है, तो अन्य छात्रों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे इसकी जानकारी यूनिवर्सिटी को दें।
मौजूदा नियमों के अनुसार अगर कोई छात्र अकेले परीक्षा दे रहा हो या परीक्षा देने वाले छात्रों का समूह बहुत छोटा हो, तो वहां इंविजिलेटर मौजूद होता है। लेकिन सेमेस्टर परीक्षाओं समेत यूनिवर्सिटी के ज्यादातर एग्जाम बिना किसी निगरानी के आयोजित किए जाते रहे हैं। यह परंपरा प्रिंसटन की शैक्षणिक संस्कृति का अहम हिस्सा मानी जाती है।
प्रस्ताव पर चल रही है औपचारिक समीक्षा
बताया जा रहा है कि 25 फरवरी 2026 को हुई एक बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस बैठक में ऑनर कमेटी के प्रतिनिधि और कॉलेज के डीन Michael Gordin शामिल थे। डीन गॉर्डिन के अनुसार परीक्षा नियमों में बदलाव के लिए यूनिवर्सिटी की फैकल्टी गवर्नेंस प्रक्रिया के तहत औपचारिक मंजूरी जरूरी होगी।
उन्होंने कहा कि इंविजिलेटर से जुड़ी नीति पहले से ही “Rules and Procedures of the Faculty” दस्तावेज का हिस्सा है। इसलिए इसमें किसी भी बदलाव के लिए संबंधित समितियों की मंजूरी और पूरी फैकल्टी के वोट की आवश्यकता होगी।
कई चरणों से गुजरेगा प्रस्ताव
ऑनर कमेटी की मानद अध्यक्ष Nadya Makuk के मुताबिक इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से पहले कई स्तर की समीक्षा से गुजरना होगा। इसमें फैकल्टी और प्रशासन दोनों की भागीदारी होगी। उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जाएगी और उसके बाद ही फैकल्टी इस पर अंतिम फैसला लेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रिंसटन के ऑनर संविधान और विश्वविद्यालय के अधिकार एवं नियमों से जुड़े दस्तावेजों में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि ऐसे बदलाव के लिए छात्रों की मंजूरी जरूरी है। यानी इस फैसले पर छात्रों से औपचारिक सलाह नहीं ली जाएगी।
बढ़ती चीटिंग की घटनाएं बनी वजह
यूनिवर्सिटी में इस बदलाव की मुख्य वजह हाल के वर्षों में बढ़ती चीटिंग की घटनाएं बताई जा रही हैं। ऑनर कमेटी के अनुसार पढ़ाई और परीक्षा के तरीकों में बदलाव के कारण मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
कोविड महामारी के बाद डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल में तेजी आई है। ऐसे में कुछ छात्र परीक्षा के दौरान तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी को इस तरह की शिकायतें भी मिल रही हैं। इसी कारण अब परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए इंविजिलेटर की व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में 133 साल पुरानी परीक्षा परंपरा का अंत हो जाएगा और आने वाले समय में यहां परीक्षाएं निगरानी में आयोजित की जाएंगी।




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