
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में ममता सरकार को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत ने इस मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें उच्च न्यायालय ने शिक्षक भर्ती घोटाले में पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिया था। यानी कथित अवैध नियुक्तियों की अब सीबीआई जांच नहीं होगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों उच्च न्यायालय ने राज्य संचालित और राज्य सहायता प्राप्त स्कूलों में स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) द्वारा की गई 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य कर दिया था। हाईकोर्ट ने नियुक्तियां अमान्य करते हुए कहा था कि जिन लोगों को एसएससी पैनल की समाप्ति के बाद नौकरी मिली, उन्हें जनता के पैसे से भुगतान किया गया। सभी को चार सप्ताह के अंदर 12 फीसदी सालाना ब्याज के साथ वेतन लौटाना होगा। हाई कोर्ट ने 15 दिनों के अंदर नए लोगों को नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था।
हाई कोर्ट के फैसले को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अवैध बताते हुए कहा था कि हम उन लोगों के साथ खड़े हैं, जिनकी नौकरियां चली गईं हैं। बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ दल द्वारा न्यायपालिका के निर्णयों को प्रभावित करने का काम किया जा रहा है। बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उक्त फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी जिसपर सुनवाई करते हुए आज मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाते हैं, जिसमें सीबीआई को राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ जांच करने के आदेश दिए गए थे। पीठ अब इस मामले की सुनवाई छह मई को करेगी। कोर्ट ने पूछा है कि क्या 25 हजार नियुक्तियों में से सही तरीके से किए गए टीचर्स के अपॉइंटमेंट को अलग किया जा सकता है?
याचिका में सरकार की तरफ से कहा गया है कि ‘उच्च न्यायालय पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने के प्रभाव को समझने में विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता राज्य को ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना, तत्काल प्रभाव से शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को सीधे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, जिससे शिक्षा व्यवस्था ठप है।’




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