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दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) : पीएचडी एडमिशन में आरक्षण नीति के उल्लंघन का आरोप, उच्चस्तरीय कमेटी से जांच की मांग

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के अर्थशास्त्र विभाग में एससी/एसटी के उम्मीदवारों को पीएचडी एडमिशन में यूजीसी व केंद्र सरकार की आरक्षण नीति की सरेआम उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाया है।  साथ ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जाति के कल्याणार्थ संसदीय समिति व राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में विशेष याचिका दायर कर पीएचडी एडमिशन में हुई अनियमितताओं की उच्चस्तरीय कमेटी से जांच कराने की मांग की है। 

फोरम के चेयरमैन डॉ.हंसराज सुमन ने आयोग व संसदीय समिति में दायर याचिका में बताया है कि अर्थशास्त्र विभाग ने अपने यहाँ पीएचडी में एडमिशन के लिए उम्मीदवारों से आवेदन मांगे। विभाग की अधिसूचना के अनुसार अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 11 सीटें , एससी–04 , एसटी –02 सीटें व ओबीसी कोटे से 08 सीटें आरक्षित रखी गई थीं। लेकिन विभाग ने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को पीएचडी में एडमिशन पाने से रोकने के लिए नियमों को दरकिनार करते हुए अपने नियम बना डाले।  इसके तहत पीएचडी एडमिशन के लिए सीयूईटी में प्राप्त कटऑफ मार्क्स अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 55 प्रतिशत और एससी /एसटी के उम्मीदवारों के लिए 50 प्रतिशत रख दी गई। जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय के नियमानुसार पीएचडी एडमिशन में अनारक्षित उम्मीदवारों के लिए 50 प्रतिशत  और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 45 प्रतिशत कटऑफ रखी गई है।

डॉ.सुमन का कहना है कि अर्थशास्त्र विभाग ने दिल्ली विश्वविद्यालय, यूजीसी व भारत सरकार की आरक्षण नीति का सरेआम उल्लंघन करते हुए पीएचडी एडमिशन में आरक्षित श्रेणी का कोटा पूरा न देते हुए पीएचडी एडमिशन का परिणाम घोषित कर दिया। इसमें अनारक्षित श्रेणी के 14 उम्मीदवारों को रखा गया जबकि इस कोटे में 11 सीटें थीं। वहीं एससी की 01 व एसटी की 01 सीट को खाली छोड़ दिया गया। उनका सवाल किया है कि विभाग ने किस आधार पर अनारक्षित उम्मीदवारों को 03 अतिरिक्त सीटें दी? इतना ही नहीं विभाग ने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों की सीटों को अनारक्षित में बदल दिया, जबकि होना यह चाहिए था कि एसटी उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है तो एससी उम्मीदवार को वह सीट दे दी जाती।
   
 डॉ.हंसराज सुमन ने कहा कि जब दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एससी/एसटी के छात्रों को  उच्च शिक्षा की अनुमति नहीं है तो अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए विकास की सीढ़ी पर आगे बढ़ने का मार्ग कैसे प्रशस्त होगा? लिहाजा उन्होंने मांग की कि एससी/एसटी कमीशन डीयू के अर्थशास्त्र विभाग में पीएचडी एडमिशन में हुई अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जाँच कराए और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को न्याय दिलाए।

Asmita Sarkar

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