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विश्वविद्यालयों में अब रोज़ाना पांच घंटे पढ़ाना अनिवार्य, जारी हुए शिक्षकों के लिए कड़े मानदंड

विश्वविद्यालयों में अब रोज़ाना पांच घंटे पढ़ाना अनिवार्य, जारी हुए शिक्षकों के लिए कड़े मानदंड

विश्वविद्यालयों में अब रोज़ाना पांच घंटे पढ़ाना अनिवार्य, जारी हुए शिक्षकों के लिए कड़े मानदंड

बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुशासन और शिक्षण गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के विश्वविद्यालयों में अब प्राध्यापकों के लिए प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे कक्षा में पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है। लोकभवन से जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि शिक्षकों को सप्ताह में कम से कम 40 घंटे का शैक्षिक कार्य हर हाल में पूरा करना होगा। जरूरत पड़ने पर प्राध्यापकों को कॉलेज या विभाग में पांच घंटे से अधिक समय भी देना पड़ सकता है ताकि निर्धारित कार्य पूरा हो सके।

निर्देश के अनुसार यह शेड्यूल एक सेमेस्टर में कम से कम 30 सप्ताह या 180 दिन के शिक्षण कार्य पर आधारित होगा। यह नियम सहायक प्राध्यापकों से लेकर प्रोफेसर स्तर तक सभी पर लागू होगा। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और यूजीसी की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा है कि विश्वविद्यालयों में इस व्यवस्था को पूरी सख्ती से लागू किया जाए।

राज्य के कई विश्वविद्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को सक्रिय करने की भी आवश्यकता जताई गई है। बीआरएबीयू में कॉलेजों और पीजी विभागों में मशीनें लग चुकी हैं, लेकिन कई जगह ये ठीक से काम नहीं कर रहीं। इससे पहले सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक शिक्षकों की अनिवार्य उपस्थिति का आदेश जारी किया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं हो सका।

मॉडल स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए 100 अंक जरूरी, इंटरव्यू भी होगा अनिवार्य

बिहार के मॉडल स्कूलों में शिक्षक बनने की राह अब और चुनौतीपूर्ण हो गई है। शिक्षा विभाग ने तय किया है कि इन स्कूलों में नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों को 100 में से पूर्ण अंक हासिल करने होंगे, साथ ही व्यक्तिगत साक्षात्कार की प्रक्रिया भी अनिवार्य होगी। जिले के मॉडल स्कूलों में कुल 153 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।

चयन प्रक्रिया कई चरणों में होगी और मूल्यांकन चार मुख्य आधारों पर किया जाएगा —

शैक्षणिक योग्यता, शिक्षण अनुभव, पूर्व प्रदर्शन और व्यक्तिगत साक्षात्कार। केवल वही उम्मीदवार चयनित होंगे जो इन सभी मानकों पर पूरी तरह खरे उतरेंगे।

साक्षात्कार का दायित्व पांच सदस्यीय चयन समिति को सौंपा गया है। इस समिति में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) अध्यक्ष होंगे, जबकि डीएम द्वारा नामित महिला पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य और डीएम द्वारा मनोनीत केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय या सैनिक स्कूल के प्राचार्य सदस्य होंगे। डीईओ समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

बिहार सरकार के इन नए नियमों से स्पष्ट है कि राज्य शिक्षण संस्थानों में जवाबदेही, गुणवत्ता और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति को मजबूत बनाने के लिए गंभीर है। इन बदलावों के लागू होने से उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा दोनों में सकारात्मक सुधार की उम्मीद है।

Asmita Sarkar

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