
फलस्तीन के समर्थन में इन दिनों पूरे अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। पुलिस अब तक 2 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी छात्रों को गिरफ्तार कर चुकी है। कैलिफोर्निया और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में तो छात्रों के प्रदर्शन को खत्म कराने के लिए पुलिस को भारी बलप्रयोग तक करना पड़ा। छात्रों के ऐसे ही प्रदर्शन के दौरान न्यू जर्सी स्थित रटगर्स यूनिवर्सिटी में फलस्तीन और कुर्द झंडों के साथ ही कश्मीर के अलगाववादी झंडे भी लहराए गए। इस घटना के प्रकाश में आने के बाद अब यह मामला गरमा गया है।
रटगर्स विश्वविद्यालय में कश्मीरी झंडा लहराए जाने पर भारतीय अमेरिकी संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। भारतीय अमेरिकी समूहों ने रटगर्स विश्वविद्यालय के चांसलर द्वारा कश्मीरी झंडे लहराने की अनुमति देने की आलोचना की है और कहा है कि इससे गलत संदेश जाएगा। ग्लोबल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पीपल ऑफ इंडियन ओरिजन (GOPIO) के अध्यक्ष थॉमस अब्राहम ने रटगर्स यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष को पत्र लिखकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान कश्मीर का अलगाववादी झंडा लहराने पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि ‘यह खतरनाक चीज है, जिसमें रटगर्स यूनिवर्सिटी दाखिल हो रही है। इससे यूनिवर्सिटी में और भी धरने-प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं। एक सार्वजनिक संस्थान को, जो सभी का है, उसे आंतरिक संघर्ष संबंधी विवादों में शामिल नहीं होना चाहिए।’
गौरतलब है कि रटगर्स यूनिवर्सिटी में 29 अप्रैल से फिलिस्तीन समर्थक छात्रों का प्रदर्शन शुरू हुआ था।प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि रटगर्स तेल अवीव यूनिवर्सिटी के साथ अपने संबंध समाप्त करे और इजराइल के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों से अलग हो जाए। 3 मई को प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे समूह ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनकी 10 में से आठ मांगें मान ली हैं। इसमें से एक मांग ये भी है कि दुनियाभर में जिन लोगों पर कब्जा है, उनके झंडे लहराए जाएं, जिनमें फलस्तीन, कुर्द के साथ ही कश्मीर का झंडा भी शामिल है। हालांकि ऐसी खबरें भी आई हैं कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ऐसी कोई मांग नहीं मानी है, लेकिन अब यह मामला तूल पकड़ चुका है।
भारतीय अमेरिकी संगठन इस कदम की जोरदार आलोचना कर रहे हैं। इसे सार्वजनिक संस्थानों के लिए गलत उदाहरण पेश करने बतौर निरूपित किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अराजकतावादियों से समझौता करना गलत है और यह जनता के विश्वास के साथ धोखा है। ‘कोएलिशन ऑफ हिंदू ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) ने तो यहाँ तक कहा है कि ‘इससे कश्मीर के अल्पसंख्यक समुदाय को नफरत और गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। इसी झंडे के नीचे कश्मीरी हिंदुओं को उनके अपने घर से विस्थापित कर दिया गया था।’
बता दें कि रटगर्स यूनिवर्सिटी में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के छात्र पढ़ते हैं और न्यू जर्सी में भारी तादाद में भारतीय मूल के लोग रहते हैं।




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